कौन है दोषी ?

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* प्रकृति से खिलवाड़… सुरंग विकास परियोजना से कई वर्ष पहले अधिकतर लोग पहाड़ों पर पर्यटकों को आकर्षित करने व रोजी-रोटी के लिए बस गए। इन लोगों ने बिना सरकारी अनुमति लिए पहाड़ों के सबसे निचले हिस्से में सबसे पहले अपने अस्थाई घर बनाने आरंभ किए। धीरे-धीरे एक दूसरे की देखा-देखी से … Read more

भाषा, संचार और ज्ञान को चाहिए औपनिवेशिक सोच से मुक्ति

डॉ. गिरीश्वर मिश्र,गाजियाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************* भारत की भाषिक विविधता का अद्भुत विस्तार और उसका सहज स्वीकार प्राचीन काल से इस देश में सामाजिक बर्ताव का अहम हिस्सा रहा है। इस विविधता को ध्यान में रख कर अक्सर भारतवर्ष को भाषाओं की एक विलक्षण प्रयोगशाला भी कहा जाता है।ऐतिहासिक रूप से अथर्ववेद के मंत्र ‘जनं विभ्रती बहुधा विवाचसं … Read more

रोका जाए बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को

ललित गर्गदिल्ली************************************** बच्चों के प्रति समाज को जितना संवेदनशील होना चाहिए, उतना नहीं हो पाया है। कैसा विरोधाभास है कि, समाज, सरकार और राजनीतिज्ञ बच्चों को देश का भविष्य मानते नहीं थकते। फिर भी उनकी बाल-सुलभ संवेदनाओं को कुचला जाना लगातार जारी है। बच्चों के प्रति संवेदनहीनता को सिर्फ जघन्य अपराधों में ही नहीं देखा … Read more

जहर कभी अमृत नहीं बन सकता

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** शराब से केंद्र और राज्य सरकारों को राजस्व-आय होने से शराब पर पाबन्दी नहीं लगा सकती है। इसके कई फायदे सरकार को हैं-राजस्व, अस्पताल, चिकित्सक, दवाई झगड़ा, हत्याएं, पुलिस, वकील, कर्मचारी आदि को शायद काम मिलता है। पेट्रोल, रेलवे, बस को भी फायदा होता है। सरकार को शराब देश हित में जरुरी भी … Read more

जन-संवेदना का प्रतिनिधित्व करती एकमात्र भाषा हिंदी

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* हिन्दी की बिन्दी… हमारे राष्ट्र व जन-संवेदना का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र भाषा है हिंदी। देश के २९ राज्यों व ८ केंद्रशासित जनसमुदाय की भाषा और बोली है। भाषा सदैव अपने समकालीन जन-जीवन में उत्पन्न होने वाले विचारों को प्रेषित करती है, और नए-नए रूपों को अपनाते हुए विकसित होती है। … Read more

संकल्प और दल रोक सकते हैं बदजुबानी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुनाया है कि कोई मंत्री यदि आपत्तिजनक बयान दे दे, तो क्या उसके लिए उसकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है ? यह मुद्दा इसलिए उठा था कि आजम खान नामक उ.प्र. के मंत्री ने बलात्कार के मामले में काफी आपत्तिजनक बयान दे … Read more

हिन्दी ज्यादा से ज्यादा बोली जाए और प्रचार हो

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** हिन्दी की बिन्दी… मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, वह समाज में रहकर ही जीवन यापन करता है, समाज में रहकर अपने कार्य को करता है। जीवन-यापन करने के लिए कुछ न कुछ कार्य अर्थात व्यापार, रोज़गार या काम करता है। एक-दूसरे की मदद से व्यापार करते हैं, सहकार करते हैं। इसी … Read more

हिंदी की बिंदी का मजाक

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** हिंदी की बिंदी… हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग १९२० से चल रही है, जिसकी शुरुआत महात्मा गाँधी द्वारा की गई थी, जो सौ वर्ष बाद भी झूला झूल रही है। हिंदी बोलने वालों की संख्या वास्तव में बढ़ गई है, हाँ पर हममें से कितनों के बच्चे हिंदी माध्यम से पढ़ रहे … Read more

विश्वभाषा की ओर हिन्दी अग्रसर

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)***************************************************************** अमरावती में जन्मे गुणाकर मुले ने ‘भारतीय लिपियों की कहानी’ लिखी। उसमें उन्होंने लिखा कि, जिस लिपि में यह पुस्तक छपी है, उसे नागरी या देवनागरी लिपि कहते हैं जो लगभग २५० वर्ष पहले बनी। इसका विकास होने से अक्षरों में स्थिरता आ गई।देवनागरी लिपि में मुख्यतः गुजराती, नेपाली, मराठी, संस्कृत, … Read more

विदेशी शिक्षण संस्थानों को न्यौतना खतरा न बने

ललित गर्गदिल्ली************************************** नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति की उपयोगिता एवं प्रासंगिकता धीरे-धीरे सामने आने लगी है। आखिरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति की शुरुआत करतेे हुए डिजिटल विश्वविद्यालय के शुरू होने और विदेशों के उच्च स्तरीय लगभग ५०० श्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों के भारत में परिसर खुलने शुरु हो जाएंगे। … Read more