मेरा जुनून

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** बैंक के मुख्य द्वार पर सूचनापट्ट लगा हुआ था,जिस पर लिखा था-‘यहाँ हिंदी में लिखे हुए चैक भी स्वीकार किए जाते हैं।’देखकर दिल बुरी तरह आहत हुआ। आँखें लाल हो गईं। दिल में अंगारे सुलगने लगे। थोड़ी देर बैठ कर स्वयं को संयत किया फिर हिंदी अधिकारी के पास गई।‘महोदय क्या मैं … Read more

चुभन

सुश्री नमिता दुबेइंदौर(मध्यप्रदेश)******************************************** सारिका इंदौर मे जन्मी भारतीय संस्कारों में घड़ी रुड़की से आई.आई.टी. कर अमेरिका की एक नामी कम्पनी कार्यरत थी, कार्य के दौरान ही उसका परिचय सूरज से हुआ था। विचारों की समता परिणय में परिलक्षित हुई। उन्होंने अपनी बेटी निकिता को भी विदेशी मिट्टी में स्वदेशी संस्कारों की सौंधी महक से पोषित … Read more

होली का हुड़दंग

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… मेरे पति होली खेलने के बेहद शौकीन हैं। जब जवान थे तो बड़े सवेरे-सवेरे शोर मचना शुरू हो जाता था ‘पानी का टब भर लिया ? बाल्टियाँ भर लीं ? टेसू के फूल उबाल लिए ? गुब्बारे भर लिए ?’होली वाले दिन नहीं,बल्कि चार दिन पहले … Read more

‘कोरोना’ काल: विद्यार्थी,शिक्षण व्यवस्था और छुट्टी

डॉ.अर्चना मिश्रा शुक्लाकानपुर (उत्तरप्रदेश)************************* ‘कोरोना’ महामारी अब लगभग खत्म हो गई है,पर यह सभी विद्यार्थियों को अलग-अलग तरह से पढ़ने के तरीके सिखा गई। इसके पहले विद्यालय में ही बच्चे पढ़ने जाया करते थे। उनको शाला जाना तब उतना अच्छा नहीं लगता था। कभी-कभी छुट्टी लेने का मन भी करता,पर पढ़ाई के नुकसान और मम्मी-पापा … Read more

पेड़ लगाओ

विजय कुमार,अम्बाला छावनी(हरियाणा) ************************** राघव जी शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी थे और सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहते थे। शहर में कई सामाजिक संस्थाओं के वह पदाधिकारी भी थे। ऐसी ही एक संस्था ने ‘पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ’ के अभियान के तहत पेड़ लगाने का प्रस्ताव पारित किया। राघव जी ने अपने सहयोगियों … Read more

रिश्तों की डोर

डॉ.पूर्णिमा मंडलोईइंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** मकर सक्रांति स्पर्द्धा विशेष…. आज संक्रांति के त्योहार पर हमेशा की तरह छत पर पतंगबाजी का कार्यक्रम था। घर के सभी सदस्य तीनों बेटे,तीनों बहुएं,बच्चे,सास,ससुर सुबह से ही छत पर आ गए थे। सभी में पतंग उड़ाने का बहुत उत्साह था। सुबह से ही सबने नाश्ते की तैयारी कर ली थी,परन्तु घर … Read more

आज मिठाई में वह स्वाद नहीं…

डॉ.अर्चना मिश्रा शुक्लाकानपुर (उत्तरप्रदेश)************************* मकर सक्रांति स्पर्द्धा विशेष…. यह बात आज से पच्चीस-तीस साल पहले की है। हम सब त्यौहारों पर अपने अम्मा-बाबूजी के साथ गाँव जाया करते थे। वहाँ दादी-बाबा के पास त्यौहार मनाने का मजा ही कुछ और होता था। वहाँ हम बच्चों का दुलार,प्यार और हुडदंग दादी-बाबा को भी बहुत अच्छा लगता … Read more

कोरोना काल…रेल यात्रा बेहाल…

तारकेश कुमार ओझाखड़गपुर(प. बंगाल ) ************************************************* वाकई भौकाल मचाने में हम भारतीयों का कोई मुकाबला नहीं। बदलते दौर में दुनिया २ भागों में बंटी नजर आ रही है। एक पर्दे की दुनिया और दूसरी असल दुनिया,इस बात का अहसास मुझे कोरोना की नई लहर के बीच की गई रेल यात्रा के दौरान हुआ। भांजी की … Read more

मृदुला सिन्हा थीं महान इंसान और साहित्यकार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *************************************************** राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष,सुप्रसिध्द साहित्यकार,समाज कल्याण बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष व गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा जितनी सशक्त लेखिका थीं,जितनी मानवाधिकारवादी थीं,उतनी ही श्रेष्ठ वे संस्कृति प्रेमी भी थीं। सरल,विनम्र,व्यवहारकुशल,मिलनसार, निरभिमानी मृदुला जी वास्तविक अंशों में राष्ट्रवादी थींl वे अत्यंत सहज व सामाजिक सरोकारों-मानवीय मूल्यों से अनुप्राणित … Read more

हिंदी-सेवी मृदुला सिन्हा का जाना साहित्य की अपूरणीय क्षति

गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा न केवल एक साहित्यकार थी,बल्कि एक सशक्त हिंदी सेवी भी थीं। २०१४ में वे गोवा की राज्यपाल बनी थी। उसी वर्ष हमने मुंबई में वैश्विक हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया था। हमने उन्हें मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित किया था। राज्यपाल बनने के बाद वे हिंदी के किसी … Read more