महकती घाटी

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)*************************************** नाशिक से मुंबई जाना मेरे लिए किसी रोमांचक सफ़र से कम नहीं होता है। इसमें हर बार का मेरा अपना अलग-अलग रोमांचित कर देनेवाला अनुभव रहा है। सह्याद्री की मनोरम घाटियाँ, टेड़ी-मेड़ी नागिन-सी बल खाती सड़क और हर ऋतु में रोज बदलने वाला सह्याद्री का मौसम, सह्याद्री की रंग बदलती चोटियाँ … Read more

गाँव की साँझ

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)*************************************** इतवार को गाँव जाना हुआ, शाम को सोचा कि खेत पर चक्कर लगा लिया जाए। सांझ ढल रही थी, अस्ताचल का सिंदुरी सूरज आरक्त होकर पश्चिम की देहरी छू रहा था। मेड़ पर खड़े होकर मैंने देखा कि १०-१२ मयूरों की टोली अपने मस्तीभरे अंदाज में कटे हुए गेहूँ के खेत … Read more

जिन्दगी का ‘नया मोड़’

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** बचपन में मैं खाने की बेहद शौकीन थी। मेरी फ्रॉक की दोनों जेबें चिलगोजे, बादाम और किशमिश से भरी रहती थीं। मक्खन, घी और मलाई खाने की बेहद शौकीन थी, लेकिन जब चीन ने १९६२ में भारत पर आक्रमण किया तो जिंदगी ने एकदम नया मोड़ ले लिया।बचपन में महाराणा प्रताप की … Read more

परिवार की सांस्कृतिक प्रेरणा ‘अम्मा जी’

रश्मि लहरलखनऊ (उत्तर प्रदेश)************************************************** मेरी नई-नई शादी हुई थी। जीवन में पहली बार मैंने करवाचौथ का निर्जला व्रत रखा था। पूजा करने के लिए तैयार हुई तो अम्मा बार-बार मुझे देख कर बताती रहीं…” नथ पहनना ज़रूरी होता है। देखो बिन्दी तिरछी है, ठीक कर लो। कान वाले झाले काहे नहीं पहिने ?”उजबक ढंग से … Read more

एक दुर्घटना…

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** आज भी जब मैं वह दुर्घटना याद करती हूँ, तो मेरा मन विचलित हो जाता है, पर जहाँ अपना कोई वश नहीं; वहाँ हम लाचार हो जाते हैं और बस दृष्टा की तरह सब कुछ देखते रहते हैं। बात उन दिनों की है, जब हम रेलवे कॉलोनी में रहते थे। पापा रेलवे … Read more

प्रकृति की अनुपम छटा

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** हमारा प्यारा जबलपुर (मप्र), ब्याह के बाद का लगभग ३० वर्ष का समय यहाँ बीता। बड़ा ही सुखद अनुभव रहा इस जगह के विषय में हमारा। सबसे पहली बात तो यह रही कि यहाँ के लोग बड़े सीधे-सादे हैं, जिन पर हम भरोसा कर सकते हैं।चाहे किसी से भी आप सहायता माँगिए, … Read more

एक श्वांस की कीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू ?

डॉ. विकास दवेइंदौर(मध्य प्रदेश ) ******************************************** आप कहेंगे एक अत्यंत गंभीर शब्द श्वांस के साथ ‘रमेश बाबू’ जैसा फिल्मी संवाद जोड़कर मैं क्यों आखिर एक गंभीर विषय को हास्य का विषय बनाना चाहता हूँ ?, किंतु अपना भ्रम दूर कर लीजिए क्योंकि, यह संवाद भी किसी हास्य का विषय नहीं, बल्कि अत्यंत गंभीर चिंता और … Read more

सतरंगी सुरों के ईर्द-गिर्द रहा जीवन

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ किशोर कुमार जन्म जयंती विशेष… एक फंटूश चल पड़ा शिकारी बन, के.एल.सहगल से प्रभावित ‘दुःखी मन मेरे, यहाँ नहीं रहना’ गाते हुए। वह दौर फिल्म जगत के लिए स्वर्णिम वर्षों में रहा। सफलता के लिए जब एक से एक महारथियों, मशहूर नामचीन कलाकारों और दिग्गज अभिनेताओं के बीच तब दादा … Read more

पिता के आखिरी शब्द

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** उनकी साँसों से मेरी खुशियाँ (पिता दिवस विशेष)… यह घटना सन १९९८ की है। जब यहाँ अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी। वहाँ पाकिस्तान ने उनसे विश्वासघात करके भारत की कारगिल चोटी पर जंगी हालात पैदा कर दिए थे। मेरे पिता जी की तबियत उन दिनों नासाज थी, जबकि उम्र … Read more

भारतीय भाषाओं के अमर सेनानी ‘डॉ. वैदिक’

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** १४ मार्च-पुण्य तिथि विशेष…. डॉ. वेद प्रताप वैदिक के व्यक्तित्व के अनेक महत्वपूर्ण पहलू हैं। वे हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, फ़ारसी व रूसी आदि अनेक भाषाओं के जानकार थे। वे विशेषकर दक्षिण एशिया की विदेश नीति के विशेषज्ञ और भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष थे। वे विश्व स्तर के कूटनीतिज्ञ थे, … Read more