बैंक की नौकरी

डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* बी.कॉम. का दूसरा वर्ष समाप्त हुआ भी नहीं था और पिताजी ने मेरा विवाह तय कर दिया। मेरे लाख मना करने के बावजूद अच्छा घर और चिकित्सक वर मिल जाने के कारण पिताजी नहीं माने। मेरे ससुरालवालों को लड़की तो पढ़ी-लिखी चाहिए थी,लेकिन नौकरी करने की बंदिश थी।विवाह की तिथि … Read more

बदले रंग ज़माने के

मधु मिश्रानुआपाड़ा(ओडिशा)******************************** दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… “अरे पप्पू यहाँ गाँव में कुम्हार तो है,शायद हरी नाम था उसका..! उससे ही तो दीदी,दीवाली के लिए दीए और कलश वगैरह लेतीं थीं…फ़िर शहर से ये सब क्यों ख़रीद कर ले आए..?” बरसों बाद उत्तर प्रदेश से आई मौसी ने कार से उतरते हुए पप्पू के थैले … Read more

४ पैसे वाला गणित

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** हम सभी ने बड़े-बुजुर्गों से सुन ही रखा है,-‘चार पैसे कमाओगे,तब समझ में आएगा…,चार लोग क्या कहेंगे…,चार दिन की चाँदनी,फिर अंधेरी रात…’ वगैरह-वगैरह। ऐसी अनेक तरह के अर्थों को समझाती अनेक कहावतें हमारी संस्कृति में उपलब्ध हैं। हम में से अनेक ने अपने बुजुर्गों को डाँट कर अपने से छोटों को … Read more

एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व

डॉ.मधु आंधीवालअलीगढ़(उत्तर प्रदेश)**************************************** २०१३ की घटना है,मैं नगर निगम के पार्षद का चुनाव लड़ी और दूसरी बार पार्षद बनी। एक सामाजिक संगठन की भी सचिव थी तो मैं और संगठन के अध्यक्ष शहर में अवैध कट्टी घर पर लगातार बोल रहे थे। मैं निगम में कट्टी घर पर लड़ाई लड़ रही थी। उसी प्रकरण में … Read more

पढ़ाई अंग्रेजी में, लेकिन बात हिन्दी में ही

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** भारत की आत्मा ‘हिंदी’ व हमारी दिनचर्या…. हमारे समय में हिन्दी का ही बोलबाला था। अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय बड़े शहरों में ही होते थे,वो भी गिनती के,जिसमें प्रवेश पाना भी आसान नहीं होता था। इसके अलावा अभिभावकगण भी हिन्दी माध्यम से ही शिक्षा दिलाने को मर्यादित मानते थे यानि हिन्दी … Read more

‘आप अनपढ़ हो…?’

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** आज तक मैंने जिस कार्यालय में भी काम किया है,वहाँ यह कोशिश की कि लोग अंग्रेजी का मोह त्याग सकें और हिंदी को प्रोत्साहन मिले। एक कार्यालय में जनसंपर्क बहुत ज्यादा होता था। आजकल लोगों को अंग्रेजी बोलने का कुछ ज्यादा ही शौक चर्राया हुआ है। जो आता…चटर-पटर अंग्रेजी में बोलता। मैं … Read more

शिक्षक ही रखता है़ पटरियों की नींव

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* शिक्षक:मेरी ज़िंदगी के रंग’ स्पर्धा विशेष….. ज़िंदगी के रंग में शिक्षक का पीताबंर रंग आकाश में स्थित सूरज,चाँद,तारों व अन्य ग्रहों के संग सदैव सुख-दु:ख के बादलों की तरह छाया रहा। कभी सप्त-ऋषि सा दिखाई देता रहा तो कभी इन्द्र बन तीव्र अश्रुओं की वर्षा में अवगुणों को जीवन से दूर … Read more

शिक्षक मार्गदर्शक इंद्रधनुषी जीवन पथ के

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* शिक्षक:मेरी ज़िंदगी के रंग’ स्पर्धा विशेष….. जब भी ‘शिक्षक’ की बात होती है,तो अपने छात्र दिवस की सुनहरी यादें मन मस्तिष्क में उभर आती हैं। विद्यालय के शिक्षक हों,या कला क्षेत्र में,सबकी अपनी गरिमा होती है।सर्वप्रथम शिक्षक तो हमारे माता-पिता ही होते हैं, जो हमारे लालन-पालन के साथ हमें आ … Read more

पढ़ाई के साथ खेल भी आवश्यक

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** जब हम छोटे थे,तब दौड़ा-दौड़ी के बाद सबसे पहले लूडो खेलना शुरू किया जो आज भी उम्र के इस पड़ाव में उतने ही उत्साह से खेल लेते हैं। जब कुछ सयाने हुए तब कैरम खेलने लग गए। कुछ और सयाने हुए,तब पांव से गेंद एक दूसरे की तरफ फेंकने लगे। जब … Read more

१९६५ की देशभक्ति और प्रदर्शनी

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** यादों के झरोखे से… १९६५ में भारत और पाकिस्तान में युद्ध छिड़ा हुआ था। मैं उन दिनों उषा सिलाई स्कूल में सिलाई- कढ़ाई का प्रशिक्षण ले रही थी। उस समय लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे। उन्होंने देश के लोगों में देशभक्ति का ऐसा जज्बा पैदा कर दिया था कि महिलाओं ने अपने … Read more