दुर्दशा देख दिल रो दिया…

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (व द्वारिका-जहाँ भगवान कृष्ण और सुदामा की भेंट हुई थी) मंदिर के अंदर दुकानें सजी हुई थीं। पूजा की सामग्री बेची जा रही थी जिसके अलग-अलग दाम थे। अंदर बैठकर पूजा करने वालों के लिए हजार रूपए का पैकेट, जिसने बाहर से ही पूजा सामग्री चढ़वानी थी, उसका अलग।रैलिंग लगी … Read more

प्रभु के मार्ग

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ***************************** मेरा निजी व्यवसाय था,जिसके लिए अक्सर दूसरे शहरों में जाना पड़ता था। ज्यादातर निजी साधन (वाहन) से ही जाता था। २३ वर्ष पहले,उस दिन अम्बिकापुर जाने की चर्चा पत्नी से कर चुका था। अतः,पत्नी ने अगले दिन (१ अप्रैल १९९९) को यथावत कपड़े,टिफिन,वगैरह तैयार कर दिए। रात ९ बजे … Read more

सौतेली माँ

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** क्या बहुत बुरी होती है सौतेली माँ ?आर्थिक कमजोर घर की पढ़ी-लिखी,उम्रदराज सुघढ़ युवती,दस-बारह साल के धनाढ्य २ बेटे-बेटी की सौतेली माँ बन कर आती है।नाना-नानी मौसी मामा से गुरुमंत्र प्राप्त बच्चे,माँ नहीं उसे दुश्मन मानते हैं। उपेक्षा,अवहेलना,घृणा, झेलते घर की मुफ्त की नौकरानी बन जीती रही, जीती रही…। पहली पत्नी की … Read more

यशिका

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*********************************************** सत्य घटना…. आज यशिका को स्कूल आए हुए कई दिन हो गए थे। मुझे आशंका हो रही थी कि कहीं उसकी तबियत ज्यादा ख़राब तो नहीं हो गई। उसका मासूमियत से भरा चेहरा बार-बार मेरी नज़रों के सामने आ रहा था। पता नहीं,उस नन्हीं-सी गुड़िया में ऐसा क्या था कि उसे देखे … Read more

सच्ची होली

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** रंग और हम(होली स्पर्धा विशेष )… होली का त्यौहार मनाया जा रहा है। बच्चे,बूढ़े और जवान सभी के मन में होली की उमंग चरम सीमा पर पहुँच गई है। चारों ओर लोग एक-दूसरे को बधाईयाँ देते, गीत गाते हुए होली की खुशियाँ मना रहे हैं।प्रायः सभी लोग इसकी तैयारी वसंत … Read more

यात्रा और जीवन

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* आज से ७ वर्ष पहले एक बूढ़ा व्यक्ति रात्रि के ठीक १२ बजे के बाद किसी पशु के सिर व टाँगें लाकर दूर एक इमारत के गेट के समक्ष अच्छी-खासी मात्रा में प्लास्टिक के थैले से निकालकर डाल देता,और भूख से बेहाल श्वान उसके आगे-पीछे दुम हिला-हिला कर घूमते रहते। सही … Read more

पश्चिम से पुन: पूर्व की ओर…

शकुन्तला बहादुर कैलिफ़ोर्निया(अमेरिका) ********************************************************* विश्व हिंदी दिवस’ विशेष…. स्वर्ग में सभा जुटी थी। महर्षि पतंजलि उदास बैठे थे। योगिराज श्रीकृष्ण और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भी सभा में थे। तभी नारद मुनि आ पहुँचे। सबने अभिवादन किया। मुनि बोले, महर्षि पतंजलि! आप इतने उदास क्यों हैं ? ऋषि ने कहा-“क्या बताऊँ तुमको ? मैंने अपना योगदर्शन का … Read more

साड़ीवाला…

डॉ. सोमनाथ मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)******************************************* मैं ऑफिस जाने के लिए जूता पहन ही रहा था,कि एक मोटा-ताजा आदमी अपने दोनों हाथों में गठरी ले कर मुझे नमस्कार करते हुए और मेरी उपेक्षा करते हुए घर में प्रवेश कर गलीचे पर बैठ गया,और गठरी खोलने लगा। मैं अचंभित रह गया,’न जान न पहचान-बड़े मियां सलाम’ वाली बात … Read more

औचित्यहीन खर्चीले विवाह समारोह

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** मुझे तो आज तक भी समझ नहीं आया कि दिखावे के लिए शादी-विवाह समारोह पर इतना अधिक खर्च क्यों किया जाता है ? एक शादी पर १ करोड़ रुपया खर्च कर दिया जाता है। शादी के लिए महंगे से महंगा बैंक्वेट हॉल बुक लिया जाता है। ५० तरह के व्यंजन,सलाद,शीतल पेय और … Read more

जाकी रही भावना जैसी

डॉ. सोमनाथ मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)******************************************* ‘जाकी रही भावना जैसी,प्रभु मूरत देखी तिन तैसी’ इसका मतलब जिसकी जैसी भावना उसी के अनुरूप प्रभु (श्रीराम) को उसी रूप में देखा। यह पंक्ति आजकल के मौजूदा स्वरुप में उपयोग होती है। जिसका जो भाव होता है वह परिस्थिति को उसी के आधार पर आंकलन करने लगता है। आजकल यह … Read more