वो गाय

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शीलाबड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** स्कूल की घंटी बजी। नीला बोली,-“पावी, आज माँ को खाना बनाने में देर हो गई थी, इसलिए मैं टिफिन नहीं लाई हूँ। घर जाकर लंच बॉक्स लेकर आते हैं।” स्कूल के बाहर निकल कर पावी बोली,-“देखो नीला, उस गाय के पेट में कितनी बड़ी गाँठ है। वह गाँठ के वजन के … Read more

बदलता दौर

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** इतवार की सुबह-सवेरे तड़के ही कोई रविन्द्र के आँगन से आवाजें लगा रहा था,-“भाई साहब! ओ भाई साहब! चलो चलना है क्या ?”“कौन बिरजू है क्या ?” अंदर से रविन्द्र चाय पीते हुए बोला।“जी हाँ, भाई साहब। मैं बोल रहा हूँ।” बिरजू ने झट से उत्तर दिया।रविन्द्र ने अपनी पत्नी को … Read more

शांति का राज़

डॉ. सुनीता श्रीवास्तवइंदौर (मध्यप्रदेश)*************************************** आश्रम में एक छात्र ने अपने गुरु से कहा,-“गुरुदेव, मैं शांति की तलाश में हूँ, परंतु मन की अशांति से परेशान हूँ।” गुरु ने मुस्कुराते हुए कहा,- “नदी के किनारे जाओ और वहाँ कुछ समय व्यतीत करो।” छात्र ने वहाँ जाकर देखा कि पानी शांत था, परंतु हवा चलते ही लहरें … Read more

१ गोली ‘पेरासिटामोल’ की!

डोली शाहहैलाकंदी (असम)************************************** सूरज की लालिमा के साथ आँख खुलते ही बेटी सोनी का ताप देख रीमा सोच में पड़ गई। वक्त के साथ बिगड़ती तबियत देख वह फौरन चौराहे के दवाखाना पहुंची।“भैया, पेरासिटामोल की २ गोली दे दीजिए और कुछ एंटीबायोटिक भी।”“मैडम पहले प्रिसक्रिप्शन दिखाइए।” दुकानदार ने कहा।“भैया ऐसे ही दे दीजिए, डॉक्टर के … Read more

कालू

डॉ. सुनीता श्रीवास्तवइंदौर (मध्यप्रदेश)*************************************** जीवन संघर्ष (मजदूर दिवस विशेष)… आज फिर ११ वर्षीय कालू उसके पास आकर खड़ा हो गया, बोला-“मैम कोई काम बता दो, जो बोलो वो कर दूंगा…।”एक बार उसे देखा, और कहा-“आज कोई काम नहीं है।”वह हमेशा की तरह जिद करने लगा-“मैम कुछ भी करा लीजिए, छोटी बहन को जन्मदिन की गिफ्ट … Read more

तूलिका के रंग

डॉ. सुनीता श्रीवास्तवइंदौर (मध्यप्रदेश) *************************************** होली का त्यौहार नजदीक था, राशि सोच रही थी इस बार होली पर क्या किया जाए ?घर में पारिवारिक बीमारी के कारण वैसे ही तंगी हो गई थी। उसे ध्यान आया, कुछ पुराने बर्तन पड़े थे, क्यूँ न इनको बेचकर कुछ खाने-पीने का समान ले आए ? यह सोचकर उसने … Read more

निरुत्तर

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* “अरे! शुक्ला जी आप ? कैसे हैं आप ? आप तो ‘ईद का चाँद’ हो गए हैं। रिटायर क्या हुए, आपके तो दर्शन ही दुर्लभ हो गए।” दिनेश ने सब्जी के ठेले पर टमाटर के मोल-भाव करते हुए शुक्ला जी से कहा।मुस्कुराते हुए शुक्ला जी ने कहा,-“दिनेश तुम बिलकुल नहीं … Read more

दादा-पोते का प्यार

डोली शाहहैलाकंदी (असम)************************************** मनाली जाकर हनीमून मनाने के बाद घर आकर रेनू बहुत खुश थी, पर अभी मेहंदी के रंग के कुछ महीने ही हुए थे कि, एक तरफ सासू माँ को पोता खिलाने का शौक तो सुमित को पापा बनने का शौक सताने लगा। सुमित के लाख चाहने के बाद भी वह खुद को … Read more

काश्वी

ज्योति नरेन्द्र शास्त्रीअलवर (राजस्थान)************************************************* आज राम अपना सब-कुछ गंवा चुका था। ऑफिस, खेत यहाँ तक कि, घर तक को भी बेचने की नौबत आ चुकी थी। अपने हाथों को माथे पर सटाए राम कुछ सोच रहा था, उसे हर चीज एक-एक करके याद आ रही थी। ठीक १० साल पहले उसका विवाह काश्वी से हुआ … Read more

हमारी बेटी…सुंदरी

डोली शाहहैलाकंदी (असम)************************************** गोरा चट्टा, छरहरा बदन, टमाटर जैसे गाल, पतली- पतली टांगे, फूंक मारो तो हवा में उड़ जाए। इतराती- इठलाती छोटे-से चेहरे की मासूमियत देख एक स्पर्श से कोई न चूकता। कभी कोई गोद में उठा लेता तो कभी अपने पास बुला लेता। देखते-देखते ढाई साल बीत गए। नीलू विद्यालय जाने लगी। अब … Read more