मौसम है यह प्रीत का

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)***************************************** होली का त्यौहार यह,खेलो रंग गुलाल।मौसम है यह प्रीत का,बहके-बहके चाल॥बहके-बहके चाल,पिचकते हैं पिचकारी।फागुन मस्त बहार,लिए हैं यौवन सारी॥कहे ‘विनायक राज’,खेलते हैं हमजोली।रंगों का त्यौहार,मना लो पावन होली॥

मौन

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ****************************************** मौन शक्ति का स्रोत है,चिंतन का आधार।जीवन को मिलती दिशा,जुड़े हृदय के तार॥जुड़े हृदय के तार,कष्ट सारे मिट जाते।धारण करके मौन,ईश भक्ति को पाते॥हल होता ये प्रश्न,जीवन संचालक कौन ?अंतर्मन हो शुद्ध,जो करे साधना मौन॥ धारे जो भी मौन को,पाता है सुख-चैन।मिटे दोष मन के सभी,करे भक्ति दिन-रैन॥करे भक्ति दिन रैन,सदा … Read more

खिलना फूलों-सा

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)**************************************** खिलना फूलों-सा यहाँ,महके सदा बहार।होंठों पर मुस्कान हो,मिले सभी का प्यार॥मिले सभी का प्यार,लगे जन-जन को प्यारा।सुन्दर हो व्यवहार,तुझे पूजे जग सारा॥कहे ‘विनायक राज’,गले तुम सबसे मिलना।रखना हँसी जुबान,खुशी से हरदम खिलना॥

उड़ना पंख पसार

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************* ये तन पंछी मान कर,उड़ना पंख पसार।नील गगन की छाँव में,सुन्दर-सा संसार॥सुन्दर-सा संसार,सजाना साथी सपने।मिले सभी को प्यार,बसे घर मेरे अपने॥कहे ‘विनायक राज’,हौंसला रखना रे मन।मिट जायेगा आज,सुनो रे माटी ये तन॥

फागुन गाता गीत

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* रंग और हम(होली स्पर्धा विशेष )… होली सुखकर लग रही,फागुन गाता गीत।तब ही खुश रहना सधे,रहे निकट जब मीत॥रहे निकट जब मीत,तभी होली है होली।वरना सारी रात,सजनिया बेहद रो ली॥बहक रहे जज़्बात,मिलन ने दागी गोली।लगे सदा बेनूर,बलम बिन अब तो होली॥ होली तो रंगीन है,मत होना ग़मगीन।कर धारण उल्लास को,मत … Read more

रंग भरी ये होली

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* रंग और हम(होली स्पर्धा विशेष )… होली आयी घूमकर,कहती सुंदर बात।प्रेम भाव अपनत्व का,अनुपम दें सौगात॥अनुपम दें सौगात,रंग हर समता लाए।मृदुवाणी के शब्द,सुने हर जन मुस्काए॥प्रेम रंग विस्तार,बिछे जैसे रंगोली।मिलकर खेलें खूब,कहे है प्यारी होली॥ होली के सब रंग जो,देते हैं शुभ सार।है प्रतीक हिय भाव का,श्रेष्ठ बनें व्यवहार॥श्रेष्ठ बने व्यवहार,द्वेष … Read more

बाती दीपक में जले

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************** बाती दीपक में जले,करे तिमिर को दूर।जीवन करे प्रकाशमय,रंग भरे भरपूर॥रंग भरे भरपूर,प्रकाशित ये जग सारा।जले तेल के साथ,करे तन मन उजियारा॥कहे ‘विनायक राज’,जले दीपक दिन राती।सदा रहे ये साथ,हमारे दीया-बाती॥

थाली में चंदन रखे

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)***************************************** थाली में चंदन रखे,तिलक लगाते भाल।बहनों का यह प्यार है,देखो भारत लाल॥देखो भारत लाल,देशहित सेवा करना।बहन न जाना भूल,नयी दुनिया पग धरना॥कहे ‘विनायक राज’,रक्ष करना बन माली।बहन आरती देख,सजाकर करती थाली॥

पूजा की थाली सजे

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)**************************************** पूजा की थाली सजे,आया पावन पर्व।अपनी ये संस्कृति भली,इन पे हमको गर्व॥इन पे हमको गर्व,मान-सम्मान दिलाते।खुशियाँ मिले अपार,आँगना फूल खिलाते॥कहे ‘विनायक राज’,नहीं सम व्रत है दूजा।इनसे हैं संस्कार,आरती कर लो पूजा॥

आये हैं संसार में

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)*********************************************** आये हैं संसार में,करने हैं कुछ काज।दीपक बन जलता रहे,रखने कुल की लाज॥रखने कुल की लाज,काम कुछ ऐसा करना।मातु-पिता भगवान,कष्ट इनके हैं हरना॥कहे ‘विनायक राज’,हँसी मुख से छलकाये।अँधियारा हो दूर,दीप जब बनकर आये॥