हो जाता कल्याण
अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** घन भू पर वितरण करे,जल निधि का बन दूत। जल लेकर गगरी कहे,निधि निंदित,मैं पूतll रामायण,जयसंहिता,वेद ज्ञान भंडार। सारे कवियों ने लिया,इनसे ज्ञान उधारll कविगण जो भी बाँटते,सब है जूठा ज्ञान। नहीं परोसा आज तक,एक नया पकवानll जैसे बादल धूप में,ला देता है छाँव। त्यों रज लाती ज्ञान है,छूते … Read more