कमजोर नहीं भारत की बेटियाँ

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* कोमल हैं,कमजोर नहीं भारत की ये बेटियाँ, नहीं आज से,हैं युगों से भारत का सम्मान बेटियाँ। कभी अपाला कभी गार्गी बन,संभाली भारत की पतवार बेटियाँ, बन सीता,अनुसूईया रखती घर की लाज बेटियाँ। माँ,बहन पत्नी रूप है पुरूष का आधार बेटियाँ, बन शक्ति रूप पुरुष की,लक्ष्मी,गौरी,सरस्वती हैं ये बेटियाँ। … Read more

संचय

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** संवादहीनता बढ़ रही है, बिखर रहे मानवीय मूल्य, करना होगा क्षमताओं का संचय, अनमोल है मानव मूल्य मुझे मानव ही रहने दो, जो मानवता के गुण से परिपूर्ण हो, देह है क्षणभंगुर व्यापकता को अपनाओ, याद रहेंगे सबके स्मरण में यही मानवीय गुण, संचय करो अपने अंदर मानवीय मूल्यों को, … Read more

विरह वेदना

संजीव शुक्ल ‘सचिन’  पश्चिमी चम्पारण(बिहार) ****************************************************************** है गीत ये मिलन का,गाओ मुझे सुनाओl चितचोर दिल लगाकर,यूँ दूर अब न जाओll तेरे लिए सजी हूँ,मनमीत मैं बता दूँl जो भूल तुम गये हो,चल याद मैं करा दूँll दृग से मुझे गिराकर,यूँ दूर तुम न जाओl है गीत ये मिलन का,गाओ मुझे सुनाओll चक्षु में तुम बसे … Read more

अप्पू

सविता सिंह दास सवि तेजपुर(असम) ************************************************************************* सुबह-सुबह किसी के दरवाज़ा खटखटाने से मेरी नींद खुल गई। चारों तरफ जंगल,यहाँ कौन मुझसे मिलने आया होगा। आज तो हरि काका भी छुट्टी पर है,चलो देखते हैं,सोचकर आँखें मलता हुआ मैं दरवाजे की ओर बढ़ा। खिड़की से बाहर देखा तो चौंक गया,अरे ये तो छोटा-सा हाथी का बच्चा है। … Read more

पैगाम आएगा…!

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’ मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* पैगाम आएगा जिस रोज़ मेरे चले जाने का, होगी कुछ-कुछ अलसाई-सी सुबह चारों ओर। कहीं ईमेल,व्हाट्सएप और ट्वीटर तो कहीं ट्रिंग-ट्रिंग बजा-बजा, पहुँच रहा होगा मेरे न रहने का संदेश। तनी चादर के किसी छोर से, आहिस्ता से अँगड़ाई भरे हाथों से, रिसीव होंगे फोन कॉल। उड़ जाएगी नींद … Read more

दुःखी किसान

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** इस भयंकर वर्षा ने पकी फसल को सुला दिया, उस गरीब किसान को इसने मार के रुला दिया। जो अपना कर्म समझ के पी रहा चोटों का दर्द, आज उस अन्नदाता को ईश्वर ने भी भुला दिया॥ वर्षा के कितने रुप,कभी अमृत तो कभी जहर, लेकर आई यह विनाशी अंधकार,मचाया है … Read more

भारत माँ

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* मैं भारत हूँ ,हाँ मैं भारत हूँ, तुम सबकी भाग्य विधाता हूँl देखो… पूरे जगत में अपनी विशालता की कहानी बतलाई है, त्याग है देखी,ममता देखी शौर्य का अदभुत दृश्य, दुनिया को दिखलाया है। दुनिया के दिल को जीता है बस फिर अपने ही घर में हार गईं, बैठ अंधेरी … Read more

अब कर्म करो

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* भोग ली है जिन्दगी अब कर्म करो, राजनीतिक प्रहरियों अब शर्म करो। दशकों वर्ष बीत चुके कुछ बाकी है, मन्दर-मस्जिद भूल मानवधर्म करो। सहत्र वर्ष की हो चुकी भाषणबाजी, रक्त न बहाओ क्रोध कुछ नर्म करो। युद्ध की गर्जना व ललकार समझो, व्यवस्था सुधारने हेतु रक्त गर्म … Read more

सावन आयो रे

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* पायल छम छम संग देखो, ये सावन आयो रे। रिमझिम बारिश की बूंदों संग, ये सावन आयो रे। कारी बदरिया छाए गगन में, बादल आवारा मंडरा ये। दूर गये साजन की यादें, संग संग अपनी लाएं। ओ….ओ….ओ…. बारिश की बौछारों संग देखो, सावन आयो रे। सावन….॥ रंगे हाथ हैं … Read more

हर कोई बदहाल हुआ सावन में

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** हर कोई बदहाल हुआ है सावन में। पानी जैसे काल हुआ है सावन में। रोज कमाकर खाने वाला कुनबा तो, रोटी बिन बेहाल हुआ है सावन में। एक बरस क्यों चुप्पी साधे बैठा था ? मेंढक जो वाचाल हुआ है सावन में। कोई भीग रहा है मस्ती में देखो, … Read more