नयन से नीर

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* ख़ुशी-ख़ुशी जब गले मिले हम, तब भी बहते नयन से नीर। गम में भी तड़पें जो कभी हम, तब भी बहते नयन से नीर। ठंडी-ठंडी हवा चले जब, मन्द-मन्द मुस्काए। दिल में मचलती हैं उमंगें, नयन छलक ही जाएँ। हो मुहब्बत गर हमें उनसे, तड़पें दिन और रात। नयन … Read more

तालीम और सरकार

सोनू कुमार मिश्रा दरभंगा (बिहार) ************************************************************************* हसरतें तालीम की कभी आसान नहीं होती, तालीम बिन मनुज की कोई पहचान नहीं होती। तालीम बिन तकदीर की तस्वीर नहीं बदलती, तालीम हो तो मनुज की कभी पहचान नहीं मिटती। फिर क्यों तालीम को जालिम,जाहिल बनाने चले हैं… गरीबों से तालीम छीनने को फिर से वे अड़े हैं॥ … Read more

हमें चाहिए भाईचारा

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** दान दहेज कुप्रथा तजकर,ही बच्चों की शादी हो। हम दो और हमारे दो हों,छोटी-सी आबादी हो। राह कठिन हो और हौंसला पत्थर-सा फौलादी हो- हमें चाहिए भाईचारा,खाकी हो या खादी हो॥ परिचय-अवधेश कुमार विक्रम शाह का साहित्यिक नाम ‘अवध’ है। आपका स्थाई पता मैढ़ी,चन्दौली(उत्तर प्रदेश) है, परंतु कार्यक्षेत्र की वजह से गुवाहाटी … Read more

आज बहुत रोने का मन है..

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** भीतर से मैं टूट चुका हूँ, आज बहुत रोने का मन है। दूर कहीं बस्ती से जाकर, जी भर कर सोने का मन है॥ बहुत देख ली सबकी यारी, रास न आई दुनियादारी, झूठे रिश्तों की माया में, मतलब की है मारा-मारी, अपना दु:ख अपना है लेकिन, और नहीं … Read more

प्रकृति

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** बन के सूरज तू जगत में रौशनी की किरणें बिखरा, चाँद की शीतलता लेकर तू इस धरा पर आ। झील का तू नीर बन,जग में सबकी प्यास बुझा, कल-कल करते नदी के जल की स्वर लहरी घर-घर सुना। ऊंचे पर्वत शिखर-सा तू अपना जमीर ऊंचा उठा, आदमी को … Read more

सुबह और सूर्य

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** आज सूरज की बान का अंदाज़ अलग, कभी खुशियों की मुस्कान कभी नई सुबह,कहीं कुछ खो जाने की कशमकश, विरोधाभास की सुबह! ब्राह्मण के संतुलन की शक्ति, सृष्टि की निरन्तरता शाश्वत सत्य की अभिव्यक्ति, नारी शक्ति! प्रातःप्रभात का प्रखर प्रभाकर, प्रवाहमान है प्रथम लाली दिनकर की रक्त-सी किरणें, लगता … Read more

परिवर्तन

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** हाँ,वह कहते हैं परिवर्तन आएगा, विचारों में परिवर्तन आएगा भारत में स्वच्छता पर लोग काम करेंगे, जो कड़ियां टूट गई,उनको जोड़ा जाएगा… हाँ,वह कहते हैं परिवर्तन आएगा। नेता अच्छा काम करेंगे, भ्रष्टाचार का खात्मा करेंगे विचारों में समानता होगी, हाँ,वह कहते हैं परिवर्तन आएगा। काम बिना लिए-दिए होंगे, स्पष्ट बातें सब … Read more

महिमा बरसात की

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** अब तो हो जाने दो बरसात, तपन से धरा हो गई है त्रास। बुझ रही थी नहीं सभी की प्यास, बरसात होने से पूरी हुई आस। पानी के लिए मचा था हाहाकार, बरसात होने से आया करार। ह्रदय में धरती के पड़ रही थी दरार, बरसात के आने से आ … Read more

शहर

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** लगी हुई है शहर में,जैसे कोई आग। ले प्रातः से रात तक,रहा आदमी भाग॥ ढूँढ रहा है शहर में,आकर क्यों तू प्यार। सम्बन्धों का है यहाँ,पैसा ही आधार॥ शहर बात उससे करे,हो जिससे कुछ काम। बिना स्वार्थ सम्बन्ध का,यहाँ नहीं है नाम॥ शहरों के ऊँचे भवन,पत्थर दिल के लोग। है … Read more

जी चाहता है

पुष्पा अवस्थी ‘स्वाति’  मुंम्बई(महाराष्ट्र) *********************************************** जी चाहता है मेरा,भारत नव निर्मित हो, शहरों से गांवों तक-जन जन का हित हो। जी चाहता है…॥ हर घर में रोजी-रोटी हो,जन जन बनें सशक्त, अपराध मुक्त समाज हो,सब हों देशभक्त। जात-पांत और भेद-भाव से,हृदय रहित हो, जी चाहता है…॥ जय भारत गूंजे देश-देश में,आगे प्रवृत्त हों, विश्वगुरु होने … Read more