ईरान को कमजोर समझने का फल भुगत रहा अमेरिका

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर महाशक्तियाँ एक गंभीर भूल कर बैठती हैं—वे अपने प्रतिद्वंद्वी की सैन्य शक्ति को नहीं, बल्कि उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति, भूगोल, सामाजिक सहनशीलता और रणनीतिक क्षमता को कम आंक लेती हैं। २८ फरवरी २०२६ को ईरान के विरुद्ध अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किया गया सैन्य अभियान भी कुछ … Read more

पारदर्शी सौन्दर्य

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** चंदन भइया मेरे पड़ोस में रहते थे। ६ फीट लंबा-ऊंचा कद, गौर वर्ण, गठा हुआ कसरती बदन, घुंघराले काले बाल और भूरी आँखें। एक बारगी तो लोग धोखा खा जाते थे, कि वह भारतीय है या अंग्रेज!         कॉलेज में नौकरी लगते ही रिश्तों की लाइन लग गई थी, लेकिन वह तो अपनी … Read more

भविष्य और प्रेरणा माता- पिता ही

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)…. वर्तमान में कई वृद्ध परिजनों का तिरस्कार झेल रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह जैसे आधुनिकीकरण, कामकाजी लोगों का स्थानांतरण व युवाओ का शहरों की ओर पलायन आदि से बुजुर्गों की अनदेखी हो रही है, साथ ही अपने बड़ों के प्रति आदर-सम्मान छूटता जा … Read more

माता-पिता ही मेरी ताकत

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)… उनके जीवन में हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा क्या थी। माता-पिता अपने बच्चों के लिए एक शक्ति के रूप में प्रकट होते हैं। उनसे अगाध प्रेरणा मिलती रहती है। दोनों का रिश्ता अटूट सम्बन्ध के लिए होता है। १ जून ‘माता-पिता दिवस’ … Read more

पटरी पर लौटता ३ भाषा फॉर्मूला

प्रेमपाल शर्मा*************************       आश्चर्य है कि दो-तीन विदेशी भाषाएं पढ़ना उन्हें अपने बच्चों पर अतिरिक्त बोझ नहीं लगता, लेकिन अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाएं सीखने के नाम पर वे सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। यह अनुचित है। सरकार को किसी भी हालत में झुकना नहीं चाहिए।नौवीं कक्षा में दो भारतीय भाषाएँ पढ़ना अनिवार्य।राष्ट्रीय … Read more

कभी नहीं हँसते तिजोरी में बंद ‘नोट’

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)*****************************************      पैसे की चमक के पीछे भागता आज का समाज एक अजीब-सी अंधी दौड़ का हिस्सा बन चुका है। सुबह की पहली किरण से लेकर रात के अंधेरे तक इंसान सिर्फ एक ही धुन में भाग रहा है-पैसा, तरक्की, और सुख-सुविधाएं। इस आधुनिकता की चकाचौंध में हमने भौतिक रूप से … Read more

माता-पिता हैं शक्ति और प्रेरणा

ललित गर्गदिल्ली*********************************** हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)… विश्व के अधिकतर देशों की संस्कृति में माता-पिता का रिश्ता सबसे बड़ा एवं प्रगाढ़ माना गया है। भारत में तो इन्हें ईश्वर का रूप माना गया है। माता-पिता को उनके बच्चों के लिए किए गए उनके काम, बच्चों के प्रति उनकी निस्वार्थ प्रतिबद्धता और … Read more

भारतीय लोकतंत्र को लोक केंद्रित होने की आवश्यकता

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। यह लोकतंत्र करोड़ों नागरिकों की आशाओं, संघर्षों और अधिकारों पर आधारित है। संविधान ने भारत को एक ऐसे गणराज्य के रूप में परिकल्पित किया था, जहाँ शासन की प्रत्येक व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य जनता का कल्याण हो। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ … Read more

आम आदमी विकास से बाहर ?

ललित गर्गदिल्ली*********************************** स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नए भारत के निर्माण के जिन आधार स्तंभों की कल्पना की गई थी, उनमें शिक्षा और चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। यह माना गया था कि यदि देश के नागरिक शिक्षित, स्वस्थ और जागरूक होंगे तो लोकतंत्र मजबूत होगा, सामाजिक असमानताएं कम होंगी और राष्ट्र विकास के … Read more

रिश्तों की कदर कीजिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया -२५ आज प्रधानमंत्री द्वारा देश की जनता से जो निवेदन किया गया, उसका असर अब दिखने लगा है। आज सुबह-सुबह कामवाली बाई का फोन आया- बर्तन, कपड़े मेरे घर घर भेज दो। मोदी जी ने वर्क फ्राम होम का आर्डर दिया है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, छोटे … Read more