वृक्षों, पेड़-पौधों और नदियों का अपना महत्व

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ गंगा दशहरा पर्व (२६ मई) विशेष…      दस पापों को नष्ट करने वाले शुभ योग के संयोग के साथ ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर पूरे देश में ‘गंगा दशहरा’ पर्व मनाया जाता है। इस दिन माँ गंगा के स्वर्ग से धरती पर अवतरण की खुशी में इस … Read more

राजनीतिक दलों के लिए गम्भीर चेतावनी है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में कभी-कभी ऐसे प्रतीक अचानक उभरते हैं, जो देखने में भले व्यंग्य, मजाक या इंटरनेट ट्रेंड लगते हों, लेकिन उनके भीतर समाज की गहरी बेचैनी, निराशा और राजनीतिक असंतोष छिपा होता है। मई २०२६ में सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इसी प्रकार की … Read more

याद रखो – जहाँ चाह, वहाँ राह

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नगर का नाम था ‘सुविधापुर’, पर वहाँ सुविधाएँ केवल नेताओं और अफसरों की जेब में रहती थीं। आम आदमी तो ‘आसमान से गिरा, खजूर में अटका’ जैसी हालत में जी रहा था। चुनाव आते ही नेता ‘मुँह में राम, बगल में छुरी’ लेकर गलियों में उतरते, बड़े-बड़े वादे करते … Read more

असम्भव को सम्भव कर दिखाने का नाम ‘अरुणिमा सिन्हा’

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** हम सबके लिए प्रेरणा स्त्रोत एवं जाना-पहचाना नाम है अरुणिमा सिन्हा, जिन्होंने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और साहस द्वारा असंभव को संभव करके दिखा दिया, और स्वर्ण अक्षरों मे अपने नाम को इतिहास में दर्ज करा दिया।अरुणिमा का जन्म आम्बेडकर नगर के शहजादपुर इलाके के पंडाटोला मोहल्ले के साधारण परिवार में हुआ था। … Read more

विकास की वातानुकूलित आत्महत्या

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** मनुष्य बड़ा बुद्धिमान प्राणी है। इतना बुद्धिमान, कि उसने अपने जीवन को आरामदायक बनाने के लिए ऐसी-ऐसी चीज़ें बना डालीं, जिनसे अंततः उसका जीवन ही असुविधाजनक होने लगा। यह वही प्राणी है, जो पहले पेड़ के नीचे बैठकर ठंडी हवा खाता था, फिर उसने पेड़ काटकर वहाँ इमारत बनाई, इमारत गर्म … Read more

जीत का नशा…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** मि. गुप्ता ने अपने इकलौते बेटे आरव को बचपन से ही एक ही बात घुट्टी की तरह पिलाई थी, कि जीवन में तुम्हें सदा प्रथम आना है। जीत का नशा मीठा ज़हर होता है। और मिस्टर गुप्ता ने यही अपने लाल को घोल कर पिलाया था।    साइंस एक्जिबिशन के कॉम्पीटिशन में आरव का प्रोजेक्ट … Read more

दवा-इलाज  के नाम पर मौत… कब तक ?

ललित गर्गदिल्ली*********************************** किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सेना, अर्थव्यवस्था, तकनीकी उपलब्धियों या ऊँची इमारतों से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह अपने नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति कितना संवेदनशील है। स्वास्थ्य व्यवस्था किसी भी देश की आत्मा होती है। अस्पताल केवल भवन नहीं होते, … Read more

भारतीय ज्ञान परंपरा का दिव्य आलोक ‘शास्त्र’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मानव सभ्यता के विकास में ‘शास्त्र’ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। शास्त्र केवल ग्रंथ नहीं, अपितु जीवन को दिशा देने वाले ज्ञान, अनुशासन, नीति, विज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के आधार स्तंभ हैं। भारतीय संस्कृति में शास्त्रों को ज्ञान का दिव्य स्रोत माना गया है। ‘शास्’ धातु से निर्मित … Read more

कृत्रिम बुद्धिमता : बढ़ते कदम, जिम्मेदारी सबकी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** कृत्रिम बुद्धिमता (ए.आई.) एक ऐसी तकनीक है, जो कम्प्यूटर और मशीनों को मानव सीखने, समझने, समस्या समाधान, निर्णय लेने, रचनात्मकता और स्वायत्तता का अनुसरण करने में सक्षम बनाती है।    ए.आई. से सज्जित एप्लिकेशन और उपकरण वस्तुओं को देख और पहचान सकते हैं। ये मानवीय भाषा को समझ सकते हैं। ये नई … Read more

घोषणा-पत्र की राजनीति पर लोकतांत्रिक लगाम आवश्यक

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनता का विश्वास है। चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं होते, बल्कि जनता और राजनीतिक दलों के बीच एक नैतिक अनुबंध भी होते हैं। जब कोई राजनीतिक दल चुनाव के समय घोषणा-पत्र जारी करता है, तब वह जनता के सामने अपने विचार, नीतियाँ और … Read more