नजरिया बदले मनुष्य

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ हर एक शब्द का अपना दृष्टिकोण होता है, वह अर्थ को भी व्यर्थ में बदलता है। ज़िन्दगी के इन २ पलों में सिर्फ ४ दिन ही मिलते हैं, और यहाँ जीवन, जो कभी भी रुकता नहीं है; वह तो अनंत यात्रा पर ही होता है। हम आज-कल की भाषा में … Read more

समय की मांग-प्रश्न पूछें और समाधान भी खोजें

ललित गर्गदिल्ली*********************************** कॉकरोच राजनीति…. भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह केवल मतदान की व्यवस्था नहीं, बल्कि संवाद, सहमति, असहमति, संवैधानिक मर्यादाओं और सामाजिक उत्तरदायित्वों का एक सशक्त तंत्र है। लोकतंत्र की शक्ति विरोध में निहित है, लेकिन उसकी गरिमा विरोध की शैली, उद्देश्य और मर्यादा से निर्धारित होती है। हाल के दिनों में … Read more

ज़िंदगी बदल देता है काला बोर्ड

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया -२६…    अजीब बात है, कि वो इंजीनियर नहीं है, फिर भी तारीफ के पुल बाँध लेता है। हँसना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है, पर दूसरों पर हँसना हमारे लिए हानिकारक है। उम्र बढ़ने के साथ हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम ओल्ड हो गए हैं, … Read more

स्वास्थ्य सबका अधिकार, तो ‘इलाज’ क्यों ‘बीमार’ ?

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* आज स्वास्थ्य पर सभी का अधिकार है, पर सबको अपार सुविधा नहीं मिलती है, जबकि यह मौलिक अधिकार है एवं सभी को सदाबहार सुविधा मिलनी चाहिए।    आज किसी गरीब को यदि बीमारी हो जाए, तो जीवन उसका नरक बन जाता है। पैसे की चिंता जीते-जी उसके प्राण हरती है। बड़े-बड़े लोग … Read more

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ज़िंदगी ने कदम-कदम पर इम्तिहान लिया। इतने कठिन इम्तिहान लिए, कि आज सोचती हूँ तो आश्चर्य होता है कि किस तरह से उन सब पर विजय प्राप्त की। कदम-कदम पर चुनौतियाँ आईं।    एक ऐसी लड़की… जिसके मायके में हर तरह की सुविधाएँ थीं… खाने-पीने की कोई तंगी नहीं थी। बहुत बड़ा … Read more

अद्भुत गूलर का फूल

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** नीम, पीपल और बरगद की त्रिवेणी की बात तो सबने ही सुनी होगी। इन पूजनीय वृक्षों की श्रंखला में एक और दैवीय वृक्ष है- गूलर (सिकामोर)। यह नवग्रहों के वृक्षों में एक प्रमुख वृक्ष है। दर्शन दुर्लभ होने के अर्थ में ‘गूलर का फूल होना’ मुहावरे को बचपन से प्रयोग करते रहे हैं।   … Read more

ईरान को कमजोर समझने का फल भुगत रहा अमेरिका

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर महाशक्तियाँ एक गंभीर भूल कर बैठती हैं—वे अपने प्रतिद्वंद्वी की सैन्य शक्ति को नहीं, बल्कि उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति, भूगोल, सामाजिक सहनशीलता और रणनीतिक क्षमता को कम आंक लेती हैं। २८ फरवरी २०२६ को ईरान के विरुद्ध अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किया गया सैन्य अभियान भी कुछ … Read more

पारदर्शी सौन्दर्य

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** चंदन भइया मेरे पड़ोस में रहते थे। ६ फीट लंबा-ऊंचा कद, गौर वर्ण, गठा हुआ कसरती बदन, घुंघराले काले बाल और भूरी आँखें। एक बारगी तो लोग धोखा खा जाते थे, कि वह भारतीय है या अंग्रेज!         कॉलेज में नौकरी लगते ही रिश्तों की लाइन लग गई थी, लेकिन वह तो अपनी … Read more

भविष्य और प्रेरणा माता- पिता ही

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)…. वर्तमान में कई वृद्ध परिजनों का तिरस्कार झेल रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह जैसे आधुनिकीकरण, कामकाजी लोगों का स्थानांतरण व युवाओ का शहरों की ओर पलायन आदि से बुजुर्गों की अनदेखी हो रही है, साथ ही अपने बड़ों के प्रति आदर-सम्मान छूटता जा … Read more

माता-पिता ही मेरी ताकत

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)… उनके जीवन में हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा क्या थी। माता-पिता अपने बच्चों के लिए एक शक्ति के रूप में प्रकट होते हैं। उनसे अगाध प्रेरणा मिलती रहती है। दोनों का रिश्ता अटूट सम्बन्ध के लिए होता है। १ जून ‘माता-पिता दिवस’ … Read more