राष्ट्रभाषा हिंदी के लिए संपूर्ण जीवन होम किया ‘दादा’ ने

डॉ. विकास दवेइंदौर (मध्यप्रदेश )************************************************* प्रसंगवश:कैलाशचंद्र पंत…. यह हम सबका सौभाग्य था, कि मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति और हिंदी भवन न्यास को अनेक वर्षों से पूज्य दादा पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत का सानिध्य और स्नेहाशीश प्राप्त होता रहा। लगभग ४० वर्ष की अनथक तपस्या का पर्याय है हिंदी भवन न्यास और इस गंगा से … Read more

हिंदी भाषा की रक्षा और समृद्धि का जीवंत उदाहरण

संदीप ‘सृजन’उज्जैन (मध्यप्रदेश)********************************************* प्रसंगवश:कैलाशचंद्र पंत… जब कोई महान व्यक्तित्व इस संसार से विदा होता है, तब केवल एक जीवन का अंत नहीं होता, बल्कि एक युग की स्मृतियाँ, एक विचारधारा की जीवंत परंपरा और एक सांस्कृतिक चेतना का विराट अध्याय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाता है। पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत का निधन हिंदी साहित्य, पत्रकारिता, … Read more

१ पौधा

राधा गोयलनई दिल्ली************************************** “दादी! इस बार मेरे जन्मदिन पर मुझे पौधा लगाने के लिए मत कहना। मुझे बहुत पढ़ाई करनी है। पता है ना १२वीं क्लास में आ गया हूँ। अच्छे नंबर नहीं आयेंगे तो अच्छे कॉलेज में एडमिशन भी नहीं मिलेगा।” पोते ने कहा।दादी- “बेटा! एक पौधा लगाने में कितनी देर लगती है ? … Read more

मुंशी प्रेमचंद की समकालीन प्रासंगिकता:बदलते भारत में साहित्य की नैतिक चेतना

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारतीय साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद का स्थान केवल एक महान कथाकार या उपन्यासकार के रूप में नहीं है, बल्कि वे भारतीय समाज की आत्मा के सबसे विश्वसनीय व्याख्याकार भी हैं। उन्होंने साहित्य को मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का उपकरण माना। प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की … Read more

विकास और सिसकते पहाड़, चेतना होगा

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)********************************* भारत के पर्वतीय राज्यों जैसे- उत्तराखंड, हिमांचल प्रदेश, झारखंड, अरुणांचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, अरावली क्षेत्र (राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली) छत्तीसगढ़ के पठारी क्षेत्र, उड़ीसा के पूर्वी घाटी तथा दक्षिण भारत के पश्चिमीघाट के क्षेत्र आज जिस भू-स्खलन, दरकती पहाड़ियाँ, बाढ़, मिट्टी के कटाव, नदी तल के खिसकने और प्राकृतिक असंतुलन से जूझ … Read more

धुंधलाती गुरु-गरिमा को पुनः स्थापित करने का महापर्व

ललित गर्गदिल्ली******************************* जीवन निर्माता… (गुरु पूर्णिमा विशेष-२९ जुलाई)… भारतीय संस्कृति का प्राण यदि किसी एक तत्व में समाहित है, तो वह है-गुरु। गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली चेतना है। वह मनुष्य के भीतर सोई हुई संभावनाओं को जगाता है, उसके व्यक्तित्व को संस्कारित करता है और उसे … Read more

‘परफेक्ट बहू’ का भूत

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)********************************** राधिका की तबियत खराब थी, इसलिए निशा अपनी सहेली का हाल-चाल लेने आई थी। राधिका उससे फोन पर अपनी बहू नैना की बहुत तारीफ किया करती थी।हर समय यही कहती, कि मेरी बहू तो परफेक्ट बहू है।जब नीरज की शादी हुई थी, तब वह इंडिया में नहीं थी। अब तो उसकी शादी … Read more

जल संकट: असंतुलित प्रबंधन से अस्तित्व पर मंडराता खतरा

ललित गर्गदिल्ली******************************* जल केवल प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार है। पृथ्वी पर जीवन की कल्पना जल के बिना असंभव है, फिर भी विडंबना यह है कि जिस जल को हमारी संस्कृति ने देवत्व प्रदान किया, उसी के प्रति हमारा व्यवहार सबसे अधिक लापरवाह है। आज देश और दुनिया की … Read more

कमियाँ मिटाकर लौटाना होगा विश्वास

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)**************************************** ‘नीट’ विवाद-आंदोलन…    भारत के लिए कहा जाता है कि यहाँ युवा ही भविष्य है, पर ‘नीट’,  पेपर लीक और आंदोलनों के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि – “क्या मेहनत अब भी सबसे बड़ा आधार है ?” यह कहना तर्कसंगत है, कि भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल एक परीक्षा नहीं, … Read more

स्वतंत्रता और मर्यादा का संतुलन आवश्यक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक लोकतांत्रिक राष्ट्र की आधारशिला है। यह प्रत्येक नागरिक को अपने विचार, भावनाएँ, मत तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति को निर्भय होकर व्यक्त करने का अधिकार प्रदान करती है। इसी स्वतंत्रता के कारण समाज में नवीन विचारों का आदान-प्रदान होता है, लोकतंत्र सशक्त बनता है तथा सामाजिक, सांस्कृतिक … Read more