गुण और गुनाह दोनों की ही कीमत

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** संतरंगी दुनिया-२०…         यदि आप अपनी पत्नी को खुश रखना चाहते हैं तो अपने पर्स का मुँह खुला रखें और अपना मुँह बंद रखें। वक़्त बदल गया है, पहले लड़कियाँ सफेद घोड़े पर राजकु‌मार की कल्पना किया करती थी, आजकल बीएमडब्ल्यू में गधा भी आ जाए … Read more

प्रकृति के महत्व को समझें, समझाएं

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** ‘पृथ्वी दिवस’ विशेष… हम सबको आने वाली पीढ़ी को पृथ्वी के महत्व को समझाना और बताना आवश्यक है। प्रकृति और पृथ्वी के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए २२ अप्रैल को ‘पृथ्वी दिवस’ (अर्थ डे) मनाया जाता है। हमें इसे एक दिन के स्थान पर परंपरा या आदत की तरह से मनाने … Read more

सपनों का बोझ या व्यवस्था की नाकामी!

ललित गर्गदिल्ली*********************************** कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में २ महीने में ४ छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं केवल एक संस्थान की त्रासदी एवं नाकामी नहीं हैं, बल्कि पूरे भारतीय समाज, शिक्षा व्यवस्था और हमारी सामूहिक संवेदनहीनता पर लगा गहरा प्रश्नचिह्न हैं। ये घटनाएं हमें झकझोरती हैं, कि आखिर वह कौन-सी परिस्थितियाँ हैं, जिनमें देश की … Read more

माँ-बहनों का सम्मान करो, वही असली पूजा

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हमें कई बार वैष्णो देवी जाने का मौका मिला। दर्शन के पश्चात सात कन्याओं को पूजने के बाद भोजन करवाया जाता है। हर बार मैंने देखा कि दुकान वाला चुपचाप आकर उन लड़कियों से हलवा-पूरी ले जाता था, केवल पैसे लड़कियों के पास रह जाते थे। लड़कियों की अलग-अलग २-३ पालियाँ बनी … Read more

दर्पण

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** आज भी राहुल रोज की तरह जल्दी उठा। माँ ने कहा—“बेटा, आज मोहल्ले में सफाई अभियान है, तुम भी चले जाओ।”मुँह बनाते हुए जवाब दिया—“माँ मुझे क्या मतलब इस गंदगी से ? ये काम तो सफाई वालों का है।”और तैयार होकर बाहर निकल गया।गली में कचरे का ढेर था, जिससे बदबू … Read more

समकालीन समाज की विसंगतियों पर तीखा प्रहार ‘काले धन के बोनसाई’

मुकेश इन्दौरीइन्दौर (मध्यप्रदेश) ********************************************** पुस्तक समीक्षा… नंदकिशोर बर्वे न केवल एक सशक्त व्यंग्यकार हैं, बल्कि कलाकार व नाटककार भी हैं। उनके कई नाटक चर्चित हुए हैं। श्री बर्वे अपने चुटकीले संवादों, कटाक्ष व अभिनय से पाठकों-दर्शकों पर अलग छाप छोड़ते हैं। नंदकिशोर बर्वे का ये दूसरा व्यंग्य संग्रह ‘काले धन के बोनसाई’ (न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन) है। … Read more

सोशल मीडिया: मिथक, विश्वास और भड़काव का महाजाल

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारत एक ऐसी भूमि है, जहाँ आस्था केवल मंदिर की घंटियों या अज़ान की आवाज़ तक सीमित नहीं रही। वह अब स्मार्टफोन की स्क्रीन पर भी उतर आई है — कभी पूजा-पाठ के वीडियो के रूप में, कभी धार्मिक संदेशों की झड़ी के रूप में, और कभी ऐसे दावों के रूप … Read more

जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है ‘मेरी डायरी’

मुकेश इन्दौरीइन्दौर (मध्यप्रदेश) ********************************************** ◾​प्रमुख मुद्दे:​🔹पारिवारिक और नैतिक मूल्य-लेखिका अपनी माँ को ‘प्रथम गुरु’ मानती हैं और उनसे मिले संस्कारों का उल्लेख करती हैं।🔹सामाजिक चिंताएँ-समाज में बढ़ती संवेदनहीनता, अपराध (जैसे बलात्कार) और लुप्त होते तीज-त्योहारों पर गहरा प्रहार किया गया है।🔹प्रकृति और मनोविज्ञान-इसमें पर्यावरण संरक्षण, ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और ‘ग्रोथ माइंडसेट’ … Read more

अलग अंदाज ने बनाया आवाज़ की दुनिया की मलिका

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)… जब हिंदी फिल्मों में महान विभूतियों का दौर था, गीत-संगीत गायन में एक से बढ़कर एक उदाहरण श्रेष्ठता की पायदान पर थे। ऐसे समय आशा भोसले को बड़ी बहन की परछाईं माना जाता था। तब उन्होंने अपने अंदर छुपी प्रतिभा और अद्भुत … Read more

स्वर गंगा की चंचल लहरें थीं आशा जी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)…     भारतीय संगीत आकाश का एक तेजस्वी नक्षत्र अस्त हो गया। आशा भोसले के निधन के साथ ही वह स्वर-युग समाप्त हो गया, जिसने दशकों तक श्रोताओं के हृदयों को मधुरता, चंचलता और भावों की अनंत गहराई से आलोकित किया।सन् १९३३ … Read more