सबसे महंगी चीज ‘भरोसा’

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************** सतरंगी दुनिया-३२… ‘गिरगिट’ ने आत्महत्या कर ली और सुसाईड नोट में लिखा-इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता। हमें हमेशा अपने लिए अच्छा सोचना चाहिए, क्योंकि गलत सोचने के लिए तो दुनिया बैठी है। कभी भी अफवाहों पर ध्यान मत दीजिए, क्योंकि अफवाह जलने वाले पकाते हैं, इसे … Read more

कुत्सित सोच वाले लोग बाधक

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** कुत्सित सोच (संकीर्ण मानसिकता) वाले लोग समाज, रिश्तों और खुद के विकास में सबसे बड़ा बाधक होते हैं। इनकी पहचान, नकारात्मकता और इनसे बचाव के व्यावहारिक उपाय हैं-  कुत्सित सोच वाले लोगों की पहचानदूसरों की टांग खींचना:ये लोग अपनी सफलता पर काम करने के बजाय दूसरों को नीचा दिखाने में ऊर्जा … Read more

अब यादें शेष… जो है विशेष

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )********************************** छोटे से गाँव देहरिया साहू (जिला देवास) में अपनी शिक्षा, संस्कार व समर्पण में कर्मवीर श्रेष्ठ शिक्षक, जो बच्चों के प्रति सजगतापूर्वक ईमानदारी से शासकीय शाला में अपनापन रखते हुए अपना अव्वल दे रहा था, उनका यूँ चले जाना बहुत आश्चर्यजनक है। विद्यार्थियों की योग्यता का बीज पूर्ण रूप से … Read more

हिंद-प्रशांत में भारत का बढ़ता सामर्थ्य

ललित गर्गदिल्ली******************************** भारत आज केवल विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति ही नहीं, बल्कि एक उभरती हुई वैश्विक महाशक्ति के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति ने जिस आत्मविश्वास, स्पष्टता और दूरदृष्टि का परिचय दिया है, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल … Read more

क्या शाकाहारियों को स्वच्छ हवा में साँस लेने का अधिकार नहीं ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** लोकतांत्रिक समाज में प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। यह स्वतंत्रता व्यक्तिगत गरिमा और जीवन-शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, किंतु किसी भी अधिकार की सीमा वहीं तक होती है, जहाँ से दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का हनन प्रारंभ होता है। यदि किसी व्यक्ति की भोजन … Read more

एक मुलाक़ात

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************************** जीवन में कब, कहाँ, किससे फिर से मुलाक़ात हो जाए, पता नहीं। मैं गर्मी की छुट्टियों के बाद अपने परिवार के साथ लखनऊ से जबलपुर जा रही थी। लखनऊ और कानपुर के बीच एक स्टेशन आता है- उन्नाव, जहाँ पर रेलगाड़ी थोड़ी देर रुकती है। अधिकतर उन्नाव में काम करने वाले लौटते … Read more

विमला

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** घड़ी पर निगाह डालते ही सुधा नाराजगी से बड़बड़ाने लगीं। आने दो विमला को, आज ही इसका हिसाब करके छुट्टी कर दूँगी। रोज को रोज डांटने से उनका ही मूड खराब हो जाता है, लेकिन इसको कोई फर्क नहीं पड़ता। वह मन ही मन भुनभुना रहीं थीं। तभी डोरबेल की आवाज हुई। उन्होंने … Read more

इंसान के गिरने का कोई वक़्त नहीं

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************** सतरंगी दुनिया-३१… एक कंजूस महिला ने अपनी वसीयत तैयार की, लिखा-मैं पुर्नजन्म में विश्वास करती हूँ, इसलिए यह वसीयत अपने नाम कर रही हूँ, ताकि मेरे द्वारा छोड़ी हुई सम्पत्ति अगले जन्म में मुझे ही मिले। बूंद-सा जीवन है इंसान का, लेकिन अहंकार सागर से भी बड़ा है। ये … Read more

भरोसा

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)********************************************** बड़े शहर की भीड़ में सावित्री नाम की एक विधवा अपने छोटे से संसार के साथ जी रही थी। उसके जीवन का एकमात्र सहारा थी उसकी ११ वर्ष की बेटी रिया। दिनभर वह घर-घर जाकर बर्तन माँजती और रात को सिलाई करती। उसके हाथों की मेहनत का एक ही सपना था कि … Read more

छोटे लोग, छोटी बातें

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************************** परिवार में जब कई सदस्य हों तो काम बढ़ ही जाता है। मुझे याद है मैं, मेरा भाई, दादी और मेरे चाचा और माँ-पापा, सब मिला कर छः लोग थे। माँ को पैरों में अक्सर दर्द हो जाता, बहुत भाग-दौड़ वाला काम नहीं कर पातीं थीं। वैसे जब तक सब घर में … Read more