विनाश का प्रमुख कारण अहंकार

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** एक छोटे से गाँव में एक प्रतिभाशाली मूर्तिकार रहता था, जिसका नाम था रमेश। उसे मूर्तिकला से गहरा लगाव था, और उसने अपनी पूरी ज़िंदगी इस कला को समर्पित कर दी। सालों की मेहनत से उसकी कला इतनी निखर गई कि उसकी हर मूर्ति में जान-सी मालूम पड़ती थी। गाँव के … Read more

दातून करना भूल चुके हो…तो

राधा गोयलनई दिल्ली**************************************** “आए दिन तुम्हारे दाँतों में कुछ न कुछ समस्या होती ही रहती है। डॉक्टर के पास ही चक्कर लगते रहते हैं, लेकिन फर्क कुछ नहीं पड़ा। कोलगेट टूथपेस्ट छोड़ा तो डॉक्टर के कहने पर पैप्सोडेण्ट शुरू कर दिया।“   “तो आप ही बताओ ना कि क्या करें ? दाँत किस पेस्ट से साफ … Read more

पारंपरिक शिक्षा से बर्बाद होता  युवाओं का भविष्य

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारत को युवा शक्ति का देश कहा जाता है और यह माना जाता है कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के हाथों में होता है, किंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि जिस शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से युवाओं को बदलते समय की चुनौतियों के लिए तैयार किया … Read more

पुस्तकों को पकड़ कर रखो

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** अब्राहम लिंकन ने कहा था कि “पुस्तकें आदमी को यह बताने के काम में आती हैं कि उनके ये मूल विचार इतने भी नये नहीं हैं।”    यह सच भी है कि किताबों से गुजरना श्रेष्ठ अनुभवों से गुजरने जैसा है। किताबें पढ़ने से बड़ा सुख शायद ही कोई हो। इसी लिए पुस्तकों यानी … Read more

लेखक का कर्म ‘सृजन’ और धर्म ‘लोकमंगल’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, उसका मार्गदर्शक भी होता है। लेखक केवल शब्दों का शिल्पी नहीं, बल्कि युग-चेतना का संवाहक, संस्कृति का संरक्षक और मानवीय मूल्यों का प्रहरी होता है। इसलिए लेखकों का कर्म और धर्म सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण माना जाता है।लेखक का प्रथम कर्म … Read more

हर सफलता में उनका योगदान

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मेरी असली प्रेरणा मेरे पिता जी हैं। मैंने उन्हीं की छात्र-छाया में आज अपनी मंजिल पायी है। आप ही वो वटवृक्ष हो, जिसकी छाया में मन प्रफुल्लित होता है। सदा मन कहता है कि आपके मतानुसार चलती रहूँ। आप ही जीवन हो, आप ही शक्ति हो, आप ही ताकत हो, आप … Read more

स्मार्टफोन : सेवा का साधन बने, स्वामी नहीं

ललित गर्गदिल्ली*********************************** विज्ञान और तकनीक ने मानव सभ्यता को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। आज का युग डिजिटल युग है, जहां एक क्लिक पर पूरी दुनिया हमारी हथेली में सिमट आई है। स्मार्ट फोन ने संचार, शिक्षा, व्यापार, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शासन और सामाजिक संबंधों को नई दिशा दी है, लेकिन हर तकनीकी क्रांति अपने साथ … Read more

अब दुनिया भरोसे लायक नहीं रही, क्योंकि…

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)************************************************* सतरंगी दुनिया-२९… वास्कोडिगामा अगर शादी-शुदा होता तो को कभी भी भारत की खोज नहीं कर पाता, क्योंकि कहां जा रहे हो ? कहाँ से आ रहे हो ? किसके साथ जा रहे हो ? कब वापस आओगे ? मुझे भी साथ ले चलो। मेरे लिए वहाँ से क्या लाओगे … Read more

मेरे बाबू जी… आधार स्तंभ थे

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** मेरी असली प्रेरणा… आज मैं उम्र के छठे दशक में हूँ। मेरे बाबू जी वर्षों पहले भगवान को प्यारे हो चुके हैं। वह ज्यादा पढे नहीं थे, परंतु शिक्षा के महत्व को समझते थे। मैं अपने माता-पिता की ज्येष्ठ संतान हूँ, इसलिए लाड़-प्यार से मेरी झोली भरी हुई है। मेरे बाबू जी कड़क … Read more

पहला हार्ट अटैक

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** तब की-पैड वाले फोन का चलन था। शाम को मेरा फोन बजा, पापा ने कहा “मेरी तबियत खराब है, भाई को लेकर जल्दी वैशाली नगर चौराहा डॉ. व्यास के यहाँ आ जाओ।”मैंने पूछा,” क्या हुआ पापा ?”बोले, “बस तुम लोग जल्दी आ जाओ। “  भाई ने फटाफट बाइक निकाली और … Read more