हम
ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** दीपक स्वयं हाथ रखे,हृदय तले पीर है,तलाश रहे प्रकाश को नैनों भरे नीर है। मनमर्जी की भरमार है,आदतों से लाचार,होली में दीप जलाये दीवाली अबीर है। लड़खड़ाते हड़बड़ाये,भागमभाग मचाये,भौंचक से औचक देखो,किसी को ना धीर है। निर्धन धन खूब दिखाते,धनिक धन छिपाते,झोपड़ी लिखा रंगमहल,महलों में कुटीर है। जुबान में तेज धार कर,छेद … Read more