कहाँ खो गए वो दिन…
डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* अब कहाँ बची वो धींगामस्ती,दुःख महंगा था खुशियाँ सस्ती। कहाँ खो गए खेल के वो दिन,खेल बिना जीना नामुमकिन। कंचे पिट्टू गुल्ली-डंडा पतंग,हो जाता सारा मुहल्ला तंग। दोस्तों के संग जमती महफ़िल,घर में पलभर लगता न दिल। जब आती थी पहली जुलाई,बन्द हो जाती सारी घुमाई। वो कॉपी-किताबों की तैयारी,बस्ता … Read more