पहेली समझ नहीं आती
रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ जीवन पहेली समझ में नहीं आती।कैसी है अलबेली समझ में नहीं आती। कितनी ख़्वाहिशें दफ़न हो गई दिल में,इच्छाएँ ज़हरीली समझ में नहीं आती। दिन-रात आते औऱ चले जाते हैं,किरणें रंग रँगीली समझ में नहीं आती। दुनिया के ख़ेमे में है साँसों की सरगम,कब तक सहेली समझ नहीं आती। ‘रेणू’ कहे ग़म के … Read more