दबाव एवं हिंसा की त्रासदी का शिकार बचपन

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* आज का बचपन केवल अपने घर में ही नहीं,बल्कि स्कूली परिवेश में बुलीइंग यानी दबाव एवं हिंसा का शिकार है। यह सच है कि इसकी टूटन का परिणाम सिर्फ आज ही नहीं होता,बल्कि युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते यह एक महाबीमारी एवं त्रासदी का रूप ले लेता है। यह केवल भारत की नहीं,बल्कि … Read more

सूरज के तेवर

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** आज मेरी मुलाकात सूरज से हुई, जब अर्घ्य देने छत पर गई। मैंने रवि की तरफ देख पूछा- इतने गर्म क्यों हो रहे हो ? अभी तो सुबह के सात ही बजे हैं, वो बोला मैं तो सदा से ऐसा ही हूँ मेरा समय और गर्मी के तेवर निश्चित हैंl ये … Read more

आदर्श

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** भिन्न-भिन्न नर जातियां, भिन्न-भिन्न संस्कार हम न किसी आदर्श का, कर सकते प्रतिकार। हर नर का कर्तव्य है, हृदय ग्राह्य आदर्श जीवन में लेकर चलें, हेतु प्रगति उत्कर्ष। व्यवहारिक होता नहीं, बिना विचार-विमर्श मतान्धता धर्माधन्ता, पर निर्मित आदर्श। मन स्वाधीन रहे सदा, रहे उच्च आदर्श फलीभूत होगा तभी, यह जीवन … Read more

रातभर

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* नींद आई न मुझको यूँ तेरे बिना, करवटें मैं बदलती रही रातभर। आसमां भी झुक के आता है देखो, धरा से मिलन को यहाँ रातभर। तेरी यादें भी लिपटीं मेरे जिस्म से, धड़कती रहीं बन के दिल रातभर। यूँ गगन में चमकते सितारे बहुत, कोई मेरा भी है क्या … Read more

अरिहंतों को नमन

छगन लाल गर्ग “विज्ञ” आबू रोड (राजस्थान) **************************************************************************** दिव्य लोक की राह में,रश्मि पुंज के मंत्र। महावीर क्षण साधना,जीवनभर का तंत्र॥ अरिहंतों को नमन है,सिद्धजन नमस्कार। साधक संतों नमन है,कृपा करो करतार॥ मंत्र साध सदगुण सधे,रहे न दु:ख जंजाल। शब्द भाव अनुसार ही,अंतस सच खंगाल॥ अरिहंती मंगल मिले,साध रहे है सिद्ध। माया पंछी लोभ में,डूब … Read more

किसी को मिलती मलाई,किसी को बासी भात नहीं..

लालचन्द्र यादव आम्बेडकर नगर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************************** आज यहां क्या लोकतन्त्र है! कुछ कहने की बात नहीं है। जो जितना पाये ले जाये, मुझे कोई आघात नहीं है। किसी को मिलता दूध-मलाई, किसी को बासी भात नहीं है॥ लोकतंत्र में जनमत की कुछ, ताक़त,या औकात नहीं है! सर्दी ठिठुर-ठिठुर कर बीती, क्या कुचले! जज्बात नहीं हैं! … Read more

नजर का वार

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** नजर का वार दिल पर कर गया है। नयन की मार से वह मर गया है। जिसे देखा नहीं हमने नजर भर, उसी से नैन मेरा लड़ गया है। दगा जिसने दिया है प्यार को ही, समझ लो प्यार से जी भर गया है। भयानक आंधियों को देखते ही, … Read more

मतदान करने के संकल्प के साथ कराई काव्य गोष्ठी

इंदौर। काव्य सागर संस्था इंदौर की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन जयनारायण पाटीदार कुंवर के निवास पर हुआ। शहर भर से आए कवि और श़ायरों ने गीत-गज़ल-कविताओं से यहाँ ऐसा समां बांधा कि श्रोतागण वाह-वाह करते रूके नहीं। प्रारम्भ में संस्था अध्यक्ष बृजमोहन शर्मा बृज ने काव्यपाठ किया -घर महका आँगन महका गलियां महक उठीं,बाग … Read more

न्यायपालिका की अग्नि-परीक्षा

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** हमारे सर्वोच्च न्यायालय की इज्जत दांव पर लग गई है। पहले तो प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन-उत्पीड़न का आरोप लगा और अब एक वकील ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि जस्टिस गोगोई को फंसाने के लिए कुछ ताकतवर लोगों ने यह षड़यंत्र रचा है। उस वकील ने … Read more

सुहानी शाम

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* शाम सुहानी आ गई,पंछी करते शोर। लौट रहे हैं नीड़ को,बाँध प्रीत की डोरll बैलों की घंटी बजे,जस वृन्दाबन धाम। ग्वालों की टोली लगे,संग श्याम बलरामll सतरंगी आभा लिये,बिखरे हो सिंदूर। अरुण किरण की लालिमा,देखो कुदरत नूरll शीतल मंद सुगंध पवन,और सुहानी शाम। बन जाऊँ मैं राधिका,तुम बन जाओ श्यामll … Read more