शाप देने का सुख

अरुण अर्णव खरे  भोपाल (मध्यप्रदेश) *********************************************************************** पुरातन इतिहास में निर्मल हृदय,सच्चरित्र और गुणवान व्यक्तियों द्वारा अनैतिक और धर्मविरुद्ध कार्य करने वालों को शाप दिए जाने के अनेक उदाहरण मिलते हैं,पर कलियुग में शाप–लोगों ने पहली बार सुना। जिस कलियुग में चरित्र और हृदय की पावनता का पूरी तरह से टोटा हो,उस युग में शाप दिया … Read more

दरवाजे की चीखें

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** मेरी डायरी-भाग ३ रात के 9 बज रहे थे और वह निर्दयी नशे में धुत मेरे दरवाजे को ईंटों से पीट रहा था,जिसकी ध्वनि मेरी झुग्गियों में रह रहे किरायेदारों के भी कान फाड़ रही थी। वह ईंटों के प्रहारों के साथ-साथ गाली-गलौज भी कर रहा था। … Read more

महापर्व-मतदान️ करें

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** क्या आपने मतदान किया ? मित्रों,हाँ हमने मतदान किया, मत के न केवल अधिकारी हम वरन् कर्तव्यनिष्ठ जाग्त सशक्त, सतर्क सदा तत्पर प्रबुद्ध हम प्रजा प्रबल हैं हस्ताक्षर, है यह लोकतंत्र का महापर्व तभी शक्ति समुन्नत होंगे, सदभाव शान्ति व नीति प्रीति हो शिक्षित समदर्शी लोकपाल, जनप्रतिनिधि चयन … Read more

‘मातृ दिवस’ पर फिर बड़ी स्पर्धा,नवोदितों को जीतने का विशेष मौका

इंदौर। सक्रिय और लोकप्रिय हिंदीभाषा डॉट कॉम (पोर्टल) से जुड़े सभी रचनाशिल्पियों (पंजीकृत सदस्य) और नवांकुरों के लिए भी अब तीसरी मासिक स्पर्धा कराई जा रही है। ‘मातृ दिवस’ पर आधारित इस स्पर्धा के लिए किसी भी विधा में अपनी मौलिक रचना ६ मई २०१९ तक ही भेजी जा सकती है। परिवार की प्रचार प्रमुख … Read more

छुट्टी गर्मी की

अविनाश तिवारी ‘अवि’ अमोरा(छत्तीसगढ़) ************************************************************************ लो हो गयी छुट्टियां गर्मियों की, मन में जगी आस अपनों से मिलने उत्सुक है होगी मीठी बातl कुछ शादियों में जायेंगे जमकर धूम मचाएंगे, बच्चे नाना-नानी को नाकों चने चबाएंगे दादा-दादी से मिलकर सुनेंगे नई कहानी, टीवी होगा अपना बेट-बल्ला होगा जानी नहीं घूरेंगे मम्मी-पापा,चलेगी अपनी मनमानीl छुपम-छुपाई खेलेंगे … Read more

तुम्हारी प्रीत के पौधे

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** झुकी पलकें अगर मेरी,तेरा मैं मान करता हूँ, उठी पलकें तो मानो यूँ,तेरा गुणगान करता हूँ। अगर पलकें हुई बोझिल,तो समझो याद करता हूँ, अगर हों बंद पलकें तो,बस फरियाद करता हूँ॥ नयन के नूर को किसने,कहाँ कैसे भुलाया है, तुम्हें पलकों के झूले में,सदा मैंने झुलाया है। तुम्हारे नेह … Read more

उठता धुआँ..

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ कर बंदगी- धुआँ बन उड़ती, यह जिंदगीl कर तू दुआ- न जले कोई घर, न उठे धुआँl उठता धूम्र- दूषित होती हवा, घटती उम्रl जिंदगी जुआ- समझ कर खेल, उठता धुआँl मन को छुआ- किसी की जिंदगी से, हटता धुआँl परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। … Read more

आतंक और दो बूंद आँसू

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** उफ़्फ़!! क्या लिखूँ….? कैसे लिखूँ….? इस अबोध की भाँति आज, कलम हमारी थम गयी। देखकर यह तस्वीर रातभर मैं सो नहीं पाया, आँखों से आँसू रोक न पाया क्योंकि मेरा जमीर है जिंदा, मेरी भवनाएं संवेदना है जिंदा कौन होगा ? जो यह दृश्य देख न रोया होगा, क्या … Read more

राष्ट्रीय चेतना कॆ लिए निजी स्वार्थ का बलिदान जरुरी

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** राष्ट्रीय चेतना का अभिप्राय(समाज की उन्नति) राष्ट्र की चेतना-प्राण शक्ति समाज से है। राष्ट्र शब्द समाज के अर्थ में ही प्रयुक्त होता है। जिस क्षण समुदाय में एकता की एक सहज लहर हो,उसे राष्ट्र कहते हैं। समाज और साहित्य का भी विरोध संबंध है। साहित्य सामुदायिक विकास में सहायक होता है, … Read more

क्या हश्र हुआ !

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************************************* उनका प्यार पाने की मेरी कोशिशों का कुछ ना हुआ, मेरी मौत पर कहा-लग ही गयी,आखिर बददुआ। मुझे भी करना ही पड़ा,फिर शुक्रिया अदा उनका, उनका दिया कुछ तो था वो,जो मेरा अपना ही हुआ। मुझे देखकर छुप जाने की,नहीं जायेगी उनकी आदत इसी कोशिश में लगी रहीं,जबसे जनाजे में … Read more