छह सौ वर्ष बाद भी प्रासंगिक है संत रविदास की समतामूलक समाज की क्रांतिकारी अवधारणा-डॉ. ‘मानव’

विचार गोष्ठी... नारनौल (हरियाणा)। 'मन चंगा, तो कठौती में गंगा' का उद्घोष करने वाले रविदास मानवीय चेतना-संपन्न संत और साधक होने के साथ एक क्रांतिकारी चिंतक भी थे। उनके द्वारा…

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दास्तां

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* रहे दास्तां यदि जीवित तो, पाती तब वह मान है।गौरव में जीवन की शोभा, मिलता नित यशगान है॥ दीन-दुखी के अश्रु पौंछकर, जो देता है सम्बलपेट…

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परिणाम जारी, सम्मान समारोह १२ मार्च को

सुल्तानपुर (उप्र)। सुल्तानपुर (उप्र)। सिंह एंड श्रीनिवासन उत्कर्ष ट्रस्ट द्वारा रचनाकारों से कलावती स्मृति उदीयमान रचनाकार सम्मान के लिए काव्य संग्रह आमंत्रित किए गए थे। निर्णायक मण्डल ने इसमें राजेश…

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स्पर्धा में प्रथम विजेता बने इंद्रजीत सिंह

सुल्तानपुर (उप्र)। निहारिका साहित्य मंच और 'कंट्री ऑफ़ इंडिया' द्वारा ग़ज़ल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें प्रथम विजेता इंद्रजीत सिंह, द्वितीय निभा राजीव निवीं और तृतीय डॉ. रश्मि को…

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विरोध रंग लाया, विवि ने हिंदी और हिंदीभाषी विरोधी निर्णय लिया वापस

हाल-ए-बंगाल... आसनसोल (पश्चिम बंगाल)। जनाक्रोश और विद्वानों के विरोध के चलते उत्तर बंग विश्वविद्यालय को स्नातक स्तर के अपने परीक्षार्थियों को हिन्दी में उत्तर लिखने पर लगी रोक वापस लेनी…

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‘खिड़की’ सुप्रतिष्ठित ‘कृति पुरस्कार’ हेतु चयनित

देवास (मप्र)। लेखिका संघ म.प्र.द्वारा वर्ष २०२२-२३ के पुरस्कारों की घोषणा करते हुए सद्य प्रकाशित कृति 'खिड़की' (लघुकथा संग्रह) को सुप्रतिष्ठित 'कृति पुरस्कार' हेतु चयनित किया गया है। लेखिका श्रीमती…

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तपस्विनी नारी

धन की देवी का आगाज, यह है समृद्ध नारी समाज। दया व विनम्रता है एक छिपा हुआ राज, नारी शक्ति की है एक उन्नत आवाज। दया, प्रेम और विनम्रता की…

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लोकतंत्र की हत्या!

लोकतंत्र की हत्या हो गई है, ये हत्या किसने की यह प्रश्न लेकर खड़ी है जनता, न्याय के दरबार में न्याय भी बिक चुका है, अन्याय के बाजार में। हमारा…

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शीर्षक-मनचली हवा बसंती

ऋतुएं तो आएं-जाएं पर, बसंत की बात निराली कंपकंपाती ठंड में लगे, चमचमाती धूप प्यारी। इंद्रधनुषी छटा बिखेरे, फूल खिले, क्यारी-क्यारी खेत कानन सब हरे हुए, हँस रही है सृष्टि…

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शीर्षक-तुम बनो कान्हा मनभावन

तुम बनो कान्हा मनभावन, मैं अधरों पर शोभित बांसुरी तुम लय ताल सखे, मैं राधिका गीत लय की। नदिया की लहर जल बूंदों-सा, छ्ल-छ्ल बहता हृदय सरल प्रकृति के इस…

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