मातृभूमि के लाल

कैलाश भावसार  बड़ौद (मध्यप्रदेश) ************************************************* अपने रक्त से तिलक लगाया, भारत माँ के भाल पर जितना गर्व करें उतना कम, मातृभूमि के लाल पर। उऋण कभी ना हो पायेंगे, क्रान्ति के दीवानों से पार नहीं पा सके थे बुज़दिल, जिन तीनों मस्तानों से अंग्रेजों से कभी ना भय था, अविजित थे जो काल पर। जितना … Read more

हमको न आज़माना

अकबर खान ‘शाद उदयपुरी’  उदयपुर(राजस्थान) ***********************************************************  (रचना शिल्प:ग़ैर-मुदर्रफ़ ग़ज़ल-बिना रदीफ़ की) तुम लाख दूर जाओ मगर कुछ भी नहीं होना, हम दोनों साथ रहने की ख़ातिर हुए हैं पैदा। हसरत नहीं हैं मुझको कि महलों में हो ठिकाना, ये आसमाँ चादर हैं मेरी ये ज़मीं बिछौना। पैसे कमाने के लिये क्या-क्या पड़ा है खोना, देखूँ मैं … Read more

दिल की धड़कन

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ दिल ने धड़कना छोड़ दिया है, जबसे गए हो तुम दूर मुझसे। तब से नाम के सहारे जिन्दा हूँ, मैं डर गया हूँ तेरी वफ़ादारी से॥ तेरे दामन पर जो रंग लगता है, दिल मेरा यहां धड़कता है। कोई कैसे तुमको, मेरे से पहले रंग लगा सकता है। क्योंकि सबसे पहले … Read more

पीड़ा

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** जो कहा उस ओर क्यों बढ़ा ही नहीं। जो लिखा पत्र तुम्हें वो पढ़ा ही नहीं॥ मेरा जीवन एक निष्पक्ष कड़ा संघर्ष, वो क्या समझे जो कभी लड़ा ही नहीं। मेरी प्रीत रीत व देशभक्ति का फल है, कि अकेला खड़ा हूँं कोई धड़ा ही नहीं। देशद्रोही … Read more

होली चालीसा

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* दोहा- याद करें प्रल्हाद को,भले भलाई प्रीत। तजें बुराई मानवी,यही होलिका रीत॥ चौपाई- हे शिव सुत गौरी के नंदन। करूँ आपका नित अभिनंदन॥ मातु शारदे वंदन गाता। भाव गीत कविता में आता॥ भारत है अति देश विशाला। विविध धर्म संस्कृतियों वाला॥ नित मनते त्यौहार अनोखे। मेल-मिलाप,रिवाजें चोखे॥ दीवाली अरु ईद मनाएँ। … Read more

इक विश्वास था…

डॉ.रीता जैन’रीता’ इंदौर(मध्यप्रदेश) *************************************************** मेरी बेटी की शादी थी और मैं कुछ दिनों की छुट्टी लेकर शादी के तमाम इंतजाम को देख रहा थाl उस दिन सफर से लौटकर मैं घर आया तो पत्नी ने आकर एक लिफाफा मुझे पकड़ा दियाl लिफाफा अनजाना था लेकिन प्रेषक का नाम देखकर मुझे एक आश्चर्यमिश्रित जिज्ञासा हुईl ‘अमर … Read more

बिखरे रंग

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** होली के त्यौहार में,देखो बिखरे रंग। जगह-जगह पर धूम है,गले मिले हैं संग॥ नीली पीली लालिमा,रंगों की बरसात। जमीं आसमां लाल है,दिल तो है आघात॥ वन भी दुल्हन-सा सजा,ढाँक हुए हैं लाल। कली-कली में फूल है,बिखरे रंग कमाल॥ उड़ती देखो तितलियाँ,फूलों की है चाह। बिखरी हैं रंगीनियाँ,है किसको … Read more

पसीने की पुकार

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** चलते हुए राह पर हमने सुना एक बड़ा चमत्कार, झलकी बूँद भाल पर जल की पसीने ने की एक पुकार। गिरने मत देना यूँ ही व्यर्थ में खोने मत देना मेरा आकार, मुझे टपकाना उस दुर्वादल में जहाँ हो जाए जीवन साकार। मुझे प्राप्त कर हँसेगी दूर्वा हरा होगा उसका … Read more

कविता का जन्म

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** अबाध गति से अनजाने में, निशब्द भावनाओं का प्रवाह मानस पटल पर अंकित कुछ, अनबोले और अनछुए असंख्य विचार कल्पना का, मंथन कर उद्धेलित करते हैं अभिव्यक्ति को। जीर्ण-शीर्ण विचारों की सृष्टि में, संवेदना का उदगम ही प्रेरणा स्त्रोत बनता है। इन सभी भावों में क्रान्ति की, अग्नि प्रज्जवलित होने … Read more

रंग ले के आयी होली

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** रंग ले के आयी होली,अँखियों से मारे गोली। गोरियों की भींगे चोली,रंग की फुहार में। जिसका भी देखो गाल,रंग से रँगा है लाल। टोली में जवान बाल,पागल है प्यार में। गमक हवाएँ उठी,महक फिजाएँ उठी। दिल में वफ़ाएं उठी,बसंत बहार में। मन ने उड़ान भरी,आफत में जान पड़ी। सबने … Read more