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सही राह चुनना पथिक

ऋचा सिन्हा
नवी मुंबई(महाराष्ट्र)
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एक राह पर चलना पथिक,
मंज़िल सही चुनना पथिक
आगे चल दो राह मिलेंगी,
एक सही एक ग़लत पथिक।
एक पथ है जहाँ घास अधिक,
एक पथ है मैदान अधिक
ये अंतर्द्वंदता मन का,
कौन राह जाए पथिक।
सही राह चुनना पथिक…

जहाँ घास है,चला ना कोई,
जहाँ मैदान वहाँ चले अनेक
या तो खुद की राह बना,
या भीड़ संग एक हो जा।
ये तो निर्भरता मन की,
कौन राह जाए पथिक
राह सही चुनना पथिक,
राह कठिन है राही ना कोई।
सही राह चुनना पथिक…॥

सुनसान बहुत है साथी ना कोई,
ये एकाग्रता मन की
कैसे आगे जाए पथिक,
सही राह चुनना पथिक।
कोई कहे पत्थर सही,
कोई कहे आसमान सही
ये निर्णयात्मकता मन की,
किसे सत्य माने पथिक।
सही राह चुनना पथिक…॥