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ई-संगोष्ठी शब्द सर्वथा उचित,स्वीकार और प्रचारित करना चाहिए

मुद्दा-‘वेबिनार बनाम’ अपने शब्द

डॉ. रवि शर्मा ‘मधुप'(दिल्ली)-

वेबिनार के लिए हिंदी पर्याय पर चल रही परिचर्चा को पूरा पढ़ लेने तथा अपनी बौद्धिक क्षमताओं का प्रयोग करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि ई-संगोष्ठी शब्द सर्वथा उचित होने के कारण अब हमें स्वीकार और प्रचारित करना चाहिएl यह अपने भीतर भविष्य की संभावनाओं तथा अन्य मिलती-जुलती संकल्पनाओं को भी समाहित करने में सक्षम हैl यह संकर शब्द अब धीरे-धीरे प्रचलित भी होने लगा हैl

डॉ. अनुराधा शर्मा(मप्र)-

ई-संगोष्ठी उचित है।

अनामिका रोहिल्ला-

गुरुदेव को सादर नमस्कार,बहुत बढ़िया जानकारी दी आपने,जो ज्ञान को और समृद्ध करती है,महोदय आपका आत्मिक आभारl

सुषमा शर्मा-

ई-संगोष्ठी,ई-सम्मेलन,ई-परिचर्चा शब्द अनुकूल और सौम्य प्रतीत होते हैं, सुग्राह्य भी हैं। बैठक शब्द को मेलनम् से बदला जा सकता है। वर्चुअल के स्थान पर बिम्ब शब्द का प्रयोग कर सकते हैं। लाइव के स्थान पर जारी शब्द का प्रयोग कर सकते हैं और ऑनलाइन के स्थान पर ईस्थित का प्रयोग कर सकते हैंl

डॉ. मैत्रेयी कुमारी(नयी दिल्ली)-

जहां तक ‘वेबिनार’ के लिए शब्द-चयन की बात है,संस्कृत में इसके लिए ‘अन्तर्जालीय संगोष्ठी/सम्मेलन’ शब्द व्यवहृत होता है। हिंदी चूंकि,हमारी बोलचाल की भाषा है इसलिए इसके लिए सरल शब्द ई-संगोष्ठी/ई-सम्मेलन/ई-परिचर्चा इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है। इसका कारण मुखसुख/प्रयत्नलाघव/मुखसौकर्य मानना चाहिए। इससे भाषाविज्ञान में नये आयाम जुड़ेंगे,खुलेंगे और विभिन्न नूतन शब्दों का निर्माण करने में सुविधा होगी। ई-प्रत्यय से निर्मित शब्दों से मिश्र भाषा के शब्दों के उदाहरण बहुतायत से प्राप्त होंगे। नवीन उद्भावनाओं का स्वागत कर उन पर विचार अपेक्षित है।

आचार्य पं. रामकुमार शर्मा (दिल्ली)-

हिन्दी की शब्दावली के प्रयोग से ही हमारी राष्ट्रभाषा मजबूत होगी। यही वर्तमान समय की आवश्यकता है।

रावेल पुष्प(कोलकाता)-

इसमें शामिल सभी विद्वानों के विचार मैंने पढ़े। मुझे तो सबसे अधिक प्रचलन में आने लायक उपसर्ग से बनाये जाने वाले शब्द ही लगे, मसलन:ई-वार्ता,ई-संगोष्ठी,ई-चर्चा,
ई-साक्षात्कार,ई-पत्रिका और फिर ई-मेल का प्रयोग तो हम कर ही रहे हैं। वैसे हमारी ये ई-चर्चा सार्थक नतीजे तक ले ही जाएगीl

विजयलक्ष्मी(मप्र)-

एक छोटा-सा निवेदन मेरा भी है कि वेबिनार को तरंग वार्ता या तरंग चर्चा भी तो कहा जा सकता है। यह भी विचारणीय है कि हम वेबिनार के हिन्दी विकल्पों पर चर्चा तो कर रहे हैं,लेकिन अंग्रेजी माध्यम से पढ़े-लिखे लोगों के बीच इसे प्रचलित कैसे कर पाएंगे ? हमारा शब्द बस हमारे दायरे में ही सीमित होकर न रह जाए,इसके लिए क्या उपाय है ?

डॉ. एम.एल. गुप्ता आदित्य(महाराष्ट्र) –

बहुत विचार करके भाषाविदों व प्रौद्योगिकीविदों के अतिरिक्त सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श करके वर्तमान और भविष्य के सभी माध्यमों को ध्यान में रखते हुए,सभी आभासी स्वरूपों पर (लिखित,श्रव्य,श्रव्य-दृश्य तथा सजीव) प्रयोगों के लिए ‘ई’ उपसर्ग को चुना गया है। ज्यादातर लोगों ने ई-संगोष्ठी पर सहमति जताई है। इसके प्रयोग से संबंधित अनेक शब्द बन जाएँगे। और हाँ,यह शब्द चलने लगा है….। हमें इसे अपनाने के लिए कोशिश तो करनी पड़ेगी।

(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन,मुंबई)

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