राष्ट्रवाद ही भारतीयता

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* हर देशवासी कहता है कि उसे अपनी मातृभूमि से,अपनी मिटटी से प्रेम है,किन्तु क्या हम वाकई अपनी मातृभूमि से प्रेम करते हैं या सिर्फ छद्म देशभक्ति का लबादा ओढ़े रहते हैं। वैश्वीकरणके इस दौर में देशभक्ति एवं राष्ट्रीयता के मायने बहुत संकुचित हो गए हैं। १९४७ में कहने को तो हम … Read more

अपराध-विकास:आँख खोलती है घटना

९ जुलाई की सुबह टेलीविजन पर दिखाई पड़ा कि कानपुर के पास के बिकरू गाँव का विकास दुबे,जिसने ८ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी और भागा-भागा फिर रहा था,को उज्जैन के महाकाल मंदिर से निकलते समय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। और उसे थाने ले जाया गया। दुबे की गिरफ्तारी की बात सब जगह … Read more

सलामत मुस्कान रखना

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)**************************************************** सलामत होंठ पर मुस्कान रखना,सफर में ना बहुत सामान रखना।सदा जीवन रहे,सुखमय तुम्हारा- नहीं दिल में बहुत अरमान रखना॥ परिचय- शिवेन्द्र मिश्र का साहित्यिक उपनाम ‘शिव’ है। १० अप्रैल १९८९ को सीतापुर(उप्र)में जन्मे शिवेन्द्र मिश्र का स्थाई व वर्तमान बसेरा मैगलगंज (खीरी,उप्र)में है। इन्हें हिन्दी व अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। जिला-लखीमपुर … Read more

कोशिश करके तो देख

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* रोक सकता है तू लहरों को,कोशिश करके तो देखlलौटा सकता है तू तूफ़ां को,कोशिश करके तो देखI यह दुनिया जो कोसती है रात-दिन तुझे,सीने से लगायेगी एक दिन,कोशिश करके तो देखI क्यूँ फंसता है संभव-असंभव के फेर में,कर सकता है सब-कुछ,कोशिश करके तो देखI मुसीबतें खड़ी हैं जो सीना ताने तेरे … Read more

होगा पराक्रम करना

शशांक मिश्र ‘भारती’शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ****************************************************************** बहुत हो चुकी सीनाजोरी अब हमें पराक्रम करना होगा, जागो रणबांकुरों जागो शत्रुओं का देश उजड़ना होगा। मित्रता की बातें करने वाले आस्तीन के सर्प निकल गए- भारतीय वीरों द्वारा तिरंगा दुश्मन की छाती में गड़ना होगा॥ परिचय–शशांक मिश्र का साहित्यिक उपनाम-भारती हैl २६ जून १९७३ में मुरछा(शाहजहांपुर,उप्र)में जन्में हैंl वर्तमान … Read more

अश्रु तेरे बह रहे क्यों

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)**************************************************** दिल हमारा रो रहा है,अश्रु तेरे बह रहे क्यों,होंठ हैं खामोश मेरे,ये नयन कुछ कह रहे क्यों।बाँटते हो दर्द मेरा,क्यों मेरे हमदर्द बनकर- ताप ये मेरे घुटन की साथ में तुम सह रहे क्योंll परिचय- शिवेन्द्र मिश्र का साहित्यिक उपनाम ‘शिव’ है। १० अप्रैल १९८९ को सीतापुर(उप्र)में जन्मे शिवेन्द्र मिश्र का स्थाई … Read more

क्या लेना चाहेंगें आप ?

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* हाज़िर हूँ जनाब,कहिये क्या लेना चाहेंगें आप ?सोना-चाँदी तो हर कोई खरीदता है,आईये मुझसे लीजिए,कुछ ज़ज्बे,कुछ सपने,कुछ दर्द,कुछ आँसू।जी हाँ,बहुत कुछ है मेरे पास,आपके वास्तेमगर आप तो ठहरे,पढ़े-लिखे शरीफ खरीदार,तो आप ये लीजिए-मजलूमों पर जुल्म की तस्वीरें,निहत्थों की हत्या की मिसालेंभूख और बहाव का नंगा तांडव,बेकसूरों की जिंदा मौत की दास्ताँ।ये … Read more

दर्द देना आदत तुम्हारी

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)**************************************************** दर्द देना प्यार में आदत तुम्हारी बन गयी है,चोट देना मुस्कुरा कर आदत तुम्हारी बन गयी है।जानता हूँ ‘जी’ नहीं सकते,हमारे प्यार बिन तुम- आपसी तकरार की आदत तुम्हारी बन गयी हैll परिचय- शिवेन्द्र मिश्र का साहित्यिक उपनाम ‘शिव’ है। १० अप्रैल १९८९ को सीतापुर(उप्र)में जन्मे शिवेन्द्र मिश्र का स्थाई व वर्तमान … Read more

सुन ऐ मूरख चीन

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)**************************************************** भारत और चीन के रिश्ते स्पर्धा विशेष…… कायरता लख चीन की,तन-मन में आक्रोश।वार पीठ पर जो किया,खोकर अपना होश॥खोकर अपना होश,किया छल उसने ऐसा।समझ रहा निर्लज्ज,हिन्द सन इकसठ जैसा॥सुन ऐ मूरख चीन,नहीं भारत अब डरता।भुगतेगा परिणाम,जो की तूने कायरता॥ परिचय- शिवेन्द्र मिश्र का साहित्यिक उपनाम ‘शिव’ है। १० अप्रैल १९८९ को सीतापुर(उप्र)में … Read more

अब बरस भी जाओ…

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)***************************************************************** बादल का एक टुकड़ा मेरी खिड़की से गुजरा,कभी छुपता,कभी बिखरताहवा से अठखेलियाँ करता,मेरे आँगन में आ रुका।खिड़की पर टिकी रात धीरे से झपकियां लेने लगी,ऐसा लगा इस बदली से डर कर चाँदकिसी पेड़ की शाख पर जा छुपा हो…क्यों इतना इतराते हो,या फिर इस चाँद से कतराते हो…lकभी सहम कर,कभी डर … Read more