मातृत्व से वंचित

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************************** विश्व बाल दिवस स्पर्धा विशेष……….. खिलते हैं उरोज अब कुसुम जैसे, जो मोह लेते, बड़े-बड़े सप्तर्षियों को। शुक-सा बन्द है पिंजड़े में, सप्ला पुष्प की तरह खिलकर रात में। मधु, पराग रहित सुरभि को बढ़ाता है, बस कंचुकी आड़ में छिपा है स्वर्गिक सुख लिए। डरती हैं सुन्दरियाँ, अपने लालों को … Read more

मीरा उवाच

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** प्रीत प्रतीत परम प्रिय पावन,प्रिय पुनीत पुनि प्राण पखेरू। केहि विधि नेह जतावहु कान्हा,मैं पदरज तुम विकट सुमेरूll धरी अधर मुस्कान पिया हित,छलकत नीर नयन मम माहीं। सांवरि सूरत मोहनि मूरत,रूप अनूप बरन नहि जाहींll यहि उपकार करौ तुम कान्हा,हिय मा नेेह निवेदन लीजो। कोटि जनम सुख तुम पर वारौं,मोको … Read more

फसलों का `गर्भपात’

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************************** यदि, घड़ी भर के लिए उनके पास ठिठक जाती है नींद, तब भी मेरे पिता जी, नींद में बड़बड़ाते रहते हैं। उनके हाथ, नींद में भी थिरकते हैं ऐसे, जैसे जागृत अवस्था में खेत से, छुट्टा पशुओं को भगा रहे हों। जरा-सा, मक्के की पाती यदि हिल जाती है हवा से, … Read more

हवा जहरीली

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** नन्हें-नन्हें बच्चों की भी,अब आँखें क्यूँ गीली हैं, सुर्ख हरे पौधों की पत्ती,हरी नहीं क्यूँ पीली है। पावन पुण्य पवन भोर का,कड़वा कड़वा लगता है, ऐसा क्या बस इसीलिये जो,आज हवा जहरीली हैll क्यूँ खराश है ग्रीवा में,क्यूँ जलन आँख में होती है, क्यूँ उपवन के आँगन में भी,घुटन साँस … Read more

गाँव की रात

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************************** अभी-अभी घुप्प अंधेरे में, छिप जाएंगी ये गाँव की गलियाँ, गलियारे पर हो रही पैरों की पदचाप, अभी-अभी ठप्प हो जाएगी। धीरे-धीरे, घरों में बुझ जाएंगी जल रही ढिबरियां, पूरे गाँव में थकान से भरा सन्नाटा, पसर-सा जाएगा। सांय-सांय करती हुई रात में, अभी-अभी शुरु होगी कुत्तों की गश्त, दूर गन्ने … Read more

ईश्वर के कृपापात्र

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************************** ये जो जितनी भी, गगनचुंबी इमारतें दिख रही हैं, उसमें रहने वाले, सबसे खास हैं ईश्वर के। वे, पहले कृपापात्र हैं उसके, जिसके इशारे पर हवा-नदियाँ बह रही हैं। हिलते हैं वृक्षों के पत्ते, गुंजारते हैं फूलों पर भ्रमर दल, जिसकी साँसों से, करतल ध्वनि दुनिया में होती है। अधिकारी हैं … Read more

प्यास

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** जाके दिल में हो सदा,नेह स्नेह की प्यास। बबुआ उनसे राखिये,अपनेपन की आस॥ बड़ा हुआ तो क्या हुआ,जो बड़पन न आय। जैसे सागर तीर से,बबुआ प्यासो जाय॥ नीति नियत सब ठीक हो,करिये सत्य प्रयास। बबुआ वैसी तृप्ति हो,जैसी मन में प्यास॥ भूख लगे रोटी मिले,प्यास लगे तो नीर। मालिक इतना … Read more

सूखेगा कब आँख का पानी

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** घन घन घन घनघोर घटाएं,घहर घहर घबराते बादल। भरी दुपहरी दीख रहा है, सूरज को भी अस्ताचल॥ बिजली कड़की बादल बरसे,जैसे अम्बर टूट गया हो। सदियों से जो धैर्य रखा था,इंद्रदेव का छूट गया हो॥ ताल तलैया नदिया नाले,सागर में कोहराम मचा है। अंदर-बाहर तन-मन भीगा,कौन कहाँ कब कौन बचा … Read more

मँहगाई

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************************** उसकी पेट और पीठ मिली मुझे चकित करती रही, साथ ही चकित करती रही उसके आगे धरी, थाली में रोटी भी। जो किसी छाल की तरह, सूखकर ऐंठ-सी गयी थी, नमक भी रोटी से रूठकर, उसे छूना भी नागवार समझ बैठा था। मेरा धीर-गम्भीर मन करुणा से भर गया, रोने लगी … Read more

दोषी कौन…?

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** (‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ की स्थिति पर आधारित) गैरों की हम बात करें क्या,हम अपनों से हारे हैं। और शिखण्डी सरकारें अब,खेल खेलती सारे हैं॥ शिक्षा के मंदिर में जिसने,रणभेरी खूब बजाई थी। जिसकी भाषा पर भारत माँ,रोई और लजाई थी॥ जिसने माँ के आँचल पर भी,सरेआम आ थूका था। … Read more