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काम और परिवार

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड) 
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काम के पीछे भागते हैं लोग,
काम को छोड़ आराम नहीं।
काम नहीं है जी जिसके पास,
रखता है वह काम की आस॥

देखो काम है भाई जिसके पास,
वह नहीं ले पाता चैन की साँस।
सुबह काम और शाम को काम,
दिन में अधूरा तो रात को काम॥

मालिक को चाहिए काम ही काम,
परिवार के साथ कहाँ फिर आराम।
शनि हो या फिर हो दिन रविवार,
सामान्य दिन हो या तीज-त्यौहार॥

काम-काम में पिसता मेरा संसार,
करते हुए काम मन में आया विचार।
क्या मेरे लिए है यह सारा काम,
या काम के लिए मैं ही आधार!!

देखो काम-काम के चक्कर में,
पत्नी रूठी और बेटा रूठा।
संग रूठ गए सब बंधु यार,
दो भागों में बँट गया संसार॥

एक ओर काम दूजा परिवार,
ईश्वर बताओ किसे करूँ खुश!
किस पर लुटाऊँ मैं अपना प्यार।
काम या फिर परिवार…॥

परिचय–साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव- लोहापिटटी में हैL जन्मतारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद हैL भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन(डिप्लोमा)की शिक्षा प्राप्त की हैL साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल हैL आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी(विद्यालय में शिक्षक) हैL सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैंL लेखन विधा-कविता एवं लेख हैL इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना हैL पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैंL विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।

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