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मन कहता है…

राजबाला शर्मा ‘दीप’
अजमेर(राजस्थान)
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मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)…

मन की बातें सुनूँ कहाँ तक ?
जाने वो क्या-क्या कहता है।
अंतहीन आशाएं लेकर,
हर पल निर्झर-सा बहता है॥

कहता कभी चाँद पे डोलूँ,
पाखी-सा पंखों को खोलूँ
रहूँ घूमता आसमान में,
मलयानिल साँसों में घोलूँ।
बात किसी की न ये माने,
अपनी मस्ती में रहता है।
अंतहीन आशाएं लेकर,
हर पल निर्झर-सा…॥

बात किसी की न ये माने,
मन में जब उड़ने की ठाने
सपनों के बस महल बनाता,
रिश्ते सब जाने-अनजाने।
कभी ख्वाहिश का महल बनाता,
कभी स्वत: उन्हें ढहता है।
अंतहीन आशाएं लेकर,
हर पल निर्झर-सा…॥

पलभर भी कहिं नहीं ठहरता,
रोज नयी फरमाइश करता,
बाहर से लगता है सीधा,
ढेरों राज अंक में धरता।
कभी सख्त फौलाद सरीखा,
कभी मोम-सा बन रहता है।
अंतहीन आशाएं लेकर,
हर पल निर्झर सा…॥

परिचय– राजबाला शर्मा का साहित्यिक उपनाम-दीप है। १४ सितम्बर १९५२ को भरतपुर (राज.)में जन्मीं राजबाला शर्मा का वर्तमान बसेरा अजमेर (राजस्थान)में है। स्थाई रुप से अजमेर निवासी दीप को भाषा ज्ञान-हिंदी एवं बृज का है। कार्यक्षेत्र-गृहिणी का है। इनकी लेखन विधा-कविता,कहानी, गज़ल है। माँ और इंतजार-साझा पुस्तक आपके खाते में है। लेखनी का उद्देश्य-जन जागरण तथा आत्मसंतुष्टि है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-शरदचंद्र, प्रेमचंद्र और नागार्जुन हैं। आपके लिए प्रेरणा पुंज-विवेकानंद जी हैं। सबके लिए संदेश-‘सत्यमेव जयते’ का है।