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उन्नति-समृद्धि का पावन उपहार

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष ……

दीपावली दीपों का एक त्योहार है,
ऐश्वर्य,उन्नति और समृद्धि का खूब,सुंदर सा उन्नत व पावन उपहार है।

जीवन को प्रकाशित करने वाला है,
यह एक अखण्ड ज्योति पुंज जैसा।

हम-सबका यह एक सुंदर उपहार है,
बग़ीचे में गुलमोहर के आकार जैसा।

हम-सब कहते हैं दीपावली है एक शुभ दिन,
ज़िन्दगी के बाग़ में उत्पन्न सुंदर अनुपम दिन।

दीपावली दीए संग दीपों का त्योहार है,
प्रकाशित जीवन के लिए यह उपहार है।

दीपावली हम-सब क्यों मनाते हैं ?
इस दिन शुभ-लाभ हर घर-घर में,स्वस्तिक के संग क्यों लिखे जाते हैं।

यह दीपावली अपने लोगों को जानने-समझने की यहां एक सख्त जरूरत है,
मिठाई संग खुशियां नजदीक लाने की,घर-घर में सबको मानो एक नसीहत है।

दीपावली खुशी और विजय का एक प्रतीक है,
घर-परिवार में प्रकाशित जैसे एक संदीप है।

घर-घर दीए जलाकर घर-समाज में खूब खुशियां मनाई जाती है,
उत्सुकता से इस पर्व की,खूब दिल से यहां खूब प्रतीक्षा की जाती है।

रंग-रोगन का है रूप इस त्योहार का है एक,उन्नत रंग,
यह पर्व दिखलाता है सभी में इस दिन खूब उमंग।

घर को श्रंगारित कर जश्न मनाने का है यह शुभ दिन,
हरपल हर लोगों के बीच खुशियां बांटने का है यह उन्नत दिन।

घर-घर में प्रकाशित होता रहता है इस दिन यहां एक रंग प्रकाश का,
अंधेरे को कोने-कोने से खत्म करने का उद्यम है, जैसे यह पर्व हो उल्लास का।

गणेश-लक्ष्मी की खूब कृपा रहती है इस दिन सबके यहां,
हम-सब श्रद्धा से जागृत करते हैं इस शुभ दिन, मिलकर खूब यहां।

पूजा के श्रंगार से आरती की बहार रहती इस दिन,
सनातनी के लिए ऐश्वर्य-अभिषेक को,घर लाता है यह दिन।

लक्ष्मी-गणेश का पूजन घर में समृद्धि की एक पहचान है,
हर घर-घर में प्रकाशित दिखाई देती है,जैसे सौन्दर्य ही इस पर्व का प्रमाण है।

पूजा के बाद अपनों के बीच मिठाइयां बांटने का यह है एक पावन पर्व,
उत्साह और उमंग से भरपूर दिखती है एक नज़र,
लगता जैसे हो एक स्वर्ग।

पटाखे के संसार में बच्चों का खूब दिखता है यहां
एक खूबसूरत संसार,
बच्चों में खूब रोशनी के लिए,लगता है जैसे छिड़
गया हो एक संग्राम।

दीपावली मिलन भी हम-सब खुशी से इस दिन मनाते हैं,
सब लोग एक-दूसरे से गले-गले मिलकर खूब,खुश हो जाते हैं।

पटाखों की ज़िद भी यहां बच्चों में खूब भाती है,
माँ-बाप की भावना भी इसको ज़िन्दगी की खुशियां बताती है।

घर-घर में दीए का यह प्रकाशित संसार यहां एक, संस्मरण बन जाता है,
हर वर्ष असंख्य दीपों के साथ दीपावली को,
‘फिर लौट आना’ कह विदा किया जाता है।

यह विजय की खुशी का एक उन्नत त्योहार है,
दिव्य ज्योति-सा खुशी देने वाला यह त्योहार है।

सावधानियां भी बड़ी यहां एक नियमित जरूरत है,
कहीं यह खुशी रूठ न जाएं को सुरक्षित रखने की भी बड़ी जरूरत है॥

परिचय-पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

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