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एक चेतावनी…

डॉ.मंजूलता मौर्या 
मुंबई(महाराष्ट्र)
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दरकते पहाड़,उफनती नदियाँ,
समुद्र से आता हुआ मौत का सैलाब…
आंधी से बर्बाद होते गाँव और शहर,
एक चेतावनी है…।

कहीं दहकता ज्वालामुखी है,
कहीं भूकंप से काँपती धरती…
और कहीं बादल का सीना फट जाना,
एक चेतावनी है…।

सूर्य देव क्रुद्ध हो आग बरसा रहे,
इंद्र देव भी हमसे रुष्ठ हो रौद्र रूप दिखा रहे…
जीवनदायिनी धरती पापविनाशिनी बन रही,
एक चेतावनी है…।

सारी सीमाएँ लाँघ चुका है मानव का घमंड,
खंड-खंड हो रहा है यह सुंदर भूखंड…
प्रकृति का यह विनाशक स्वरूप,
एक चेतावनी है…।

अब भी न संभले तो,
अपनी हस्ती अपने हाथ मिटाओगे..
सजे हैं लाखों सपने जिन मासूम आँखों में,
क्या उन आँखों को बस तड़प और आँसू दे जाओगे…?

इस चेतावनी की आहट से न बनो अनजान,
यह हमारी धरती माँ हो रही है बेजान…
इसने निभाया अपना हर फर्ज,
अब कर्ज चुकाने की तुम्हारी बारी है…
एक चेतावनी है…एक चेतावनी है…॥

परिचय-डॉ.मंजूलता मौर्या का निवास नवी मुंबई स्थित वाशी में है। साहित्यिक उपनाम-मंजू है। इनकी जन्म तारीख-१५ जुलाई १९७८ एवं जन्मस्थान उत्तरप्रदेश है। महाराष्ट्र राज्य के शहर वाशी की डॉ.मौर्या की शिक्षा एम.ए.,बी.एड.(मुंबई)तथा पी.एच-डी.(छायावादोत्तर काव्य में नारी चित्रण)है। निजी महाविद्यालय में आपका कार्य क्षेत्र बतौर शिक्षक है। आपकी  लेखन विधा-कविता है। विशेष उपलब्धि शिक्षकों के लिए एक प्रकाशन की ओर से आयोजित निबंध प्रतियोगिता में पुरस्कृत होना है। मंजू जी के लेखन का उद्देश्य-चंचल मन में उठने वाले विविध विचारों को लोगों तक पहुँचाकर हिंदी भाषा की सेवा करना है।