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एक बात बोलूं

मोनिका गौड़’मोनिका’
बीकानेर (राजस्थान )
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मेरी छोटी-छोटी ख्वाहिशें,
नन्हें से तुमसे ही जुड़े प्रश्न
नाजुक-सी अन्तस की बातें,
जब कहती हूँ
वो देखो चाँद के पास झिलमिलाता एक सितारा,
गौरैया की पंख के रंग का शेड देखा तुमने!
तुम्हारी ऐनक की थोड़ी-सी टेढ़ी हुई डंडी,
चाय के कप में बुझे सिगरेट के टोटे तुम्हारे विचारों के सूत्र लगते हैं,
सिर्फ तुम्हें ही देखते रहने का मन क्यों हो रहा है ?
कितनी आसानी से टाल देते हो,
कविता की भारी-सी पंक्ति में उलझाकर,
कभी ऑफिस और सरकार के मुद्दों के नीचे धकेल देते हो
मेरे मन की चिड़िया के पंख का रंग,
अपने ही मामले में सचेत रहकर
अंगुली पकड़ खड़ा कर देते हो
समझदारी की पगडंडी पर,
जबकि मैं अपने बचपन के साथ सिमट जाना चाहती हूँ
तुम्हारी गोद में।
सोचा है कभी ?
मेरी खिलखिलाहट,मेरी मौज
धीमी होते-होते
मरने लगी है,
सिर्फ तुम्हारे सामने ही तो खोलना चाहती हूँ
सारे बंध
सारे अन्तर्द्वन्द।
कभी सुनने की कोशिश करना
मेरे फ़िजूल से सवालों में सिर्फ प्यार था,
तुम्हारे लिए
अब भी है पर शायद नहीं रहेगा,
जब मैं ही मैं नहीं रहूंगी॥

परिचय-मोनिका गौड़ का साहित्यिक उपनाम ‘मोनिका’ है। यह १२ अगस्त १९७२ को नोहर(राजस्थान)में जन्मीं हैं।वर्तमान निवास स्थल बीकानेर (राजस्थान )है। हिंदी,राजस्थानी एवं  अंग्रेज़ी का ज्ञान रखने वाली मोनिका की शिक्षा-गृह विज्ञान में स्नातक तथा बी.एड.,एम.ए.(राजस्थानी हिंदी) और ‘नेट’ है। शिक्षा विभाग में अध्यापन आपका कार्यक्षेत्र है। सामाजिक गतिविधि में सामयिक व सामाजिक कार्यों से जुड़ाव है। इनकी लेखन विधा-कविता,नज्म,समालोचना,कहानी,शोध आलेख है। प्रकाशन में आपके नाम-‘अपने आपसे अपरिचित’,’हरी-हरी खुशबू’ और ‘काली गौरैया’ हिंदी काव्य संग्रह सहित ‘हथेली में चाँद’,’अंधारै री उधारी अर रीसानो चाँद’ आदि राजस्थानी कविता संग्रह भी हैं। साथ ही रचनाओं का प्रकाशन कई पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है। कई सम्मान भी मिले हैं।आपकी लेखनी का उद्देश्य-चेतना व विरेचन है। इनके लिए प्रेरणा पुंज-पिताजी हैं।