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कृष्ण लगन सजती नहीं

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

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कृष्ण जन्माष्टमी की मची धूम है,
सोच प्रभुजी की रखते सभी खूब हैं।

मटकियां फोड़ते, बाँटते हैं दही,
पर लगन कृष्ण माखन की सजती नहीं।

लोग कहते हैं भगवान दिखते नहीं,
और ये भी कहें उन बिना कुछ नहीं।

बात विश्वास की ढूंढ ले जो जहाँ,
एक कण भी न होता वे जिसमें नहीं।

जिन्दगी एक पल भी न प्रभु के बिना,
कौन कहता जगत में वो प्रभु बिन रहा।

एक दिन की नहीं बात हर उम्र की,
जिन्दगी भर रहे कृष्ण जन्माष्टमी।

देख मैंने लिए,पर कहूं मैं किसे,
मानता कौन मुझको भी प्रभुजी दिखे।

कष्ट में सुख यहाँ कौन देता रहे,
कह रहा मन मुझे तो ये प्रभु दे गए॥

परिचय–हीरा सिंह चाहिल का उपनाम ‘बिल्ले’ है। जन्म तारीख-१५ फरवरी १९५५ तथा जन्म स्थान-कोतमा जिला- शहडोल (वर्तमान-अनूपपुर म.प्र.)है। वर्तमान एवं स्थाई पता तिफरा,बिलासपुर (छत्तीसगढ़)है। हिन्दी,अँग्रेजी,पंजाबी और बंगाली भाषा का ज्ञान रखने वाले श्री चाहिल की शिक्षा-हायर सेकंडरी और विद्युत में डिप्लोमा है। आपका कार्यक्षेत्र- छत्तीसगढ़ और म.प्र. है। सामाजिक गतिविधि में व्यावहारिक मेल-जोल को प्रमुखता देने वाले बिल्ले की लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल और लेख होने के साथ ही अभ्यासरत हैं। लिखने का उद्देश्य-रुचि है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नीरज हैं। प्रेरणापुंज-धर्मपत्नी श्रीमती शोभा चाहिल हैं। इनकी विशेषज्ञता-खेलकूद (फुटबॉल,वालीबाल,लान टेनिस)में है।

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