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क्या कहती है धड़कन…

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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बताओ ना हमारे मितवा,क्या कहती है धड़कन,
अभी तो है वसन्त ऋतु फिर क्यों आई उलझन!

बताओ ना हमारे मितवा,धड़कन क्यों रही है,
क्या वो प्रेम की नगरी में,दिल अपना ढूॅ॑ढ रही है।

ऐसे धड़क रही है धड़कन,जैसे दिल खो गया है,
बावरे दिल के खोने से,मन ही बेसुध हो गया है।

वसन्त ऋतु में धड़कन,किसी से मिलना चाह रही है,
क्या रूठ गया है कोई अपना,क्यों वह कराह रही है।

क्या जोड़ लिया है धड़कन ने,किसी दिल से नाता,
लगती है शर्माती धड़कन,कुछ कह नहीं है पाती।

धड़कना बन्द करो धड़कन,जाओ बुला लो प्यार को,
कहो दिल की बात धड़कन,खत्म करो इन्तजार को।

अन्दर में चुपचाप गुमसुम,धड़क रही है धड़कन,
देख के ‘देवन्ती’ के दिल में,हो रही है अब उलझन।

बता दिया है मितवा को,धड़कती हुई धड़कन,
रुकना मुश्किल है,जब तक ना हो दिल से मिलन।

धड़क-धड़क के धड़कन,क्या कहती है धड़कन,
आ रहा है हमारा अन्त क्षण,कब होगा उनसे मिलन..!!

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है।