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गहराई

प्रकृति दोशी
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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पैरों की उंगलियों ने पानी को छुआ,
कहा- तुम कौन हो ?
हो कौन तुम पूछा मैंने जब…
एक अनजानी चाहत ने
लिया खींच मुझे गहराई की बाँहों की ओर…
गहराई मुझे बाँहों में भरती रही
उस नीले से पानी की ठंडक
मुझे महसूस-सी होने लगी…
डूबने आयी थी
मरने आयी थी,
पर जब गहराई मुझे खींच रही थी
न जाने क्यों मैं खुद को रोक रही थी।
नीला पानी सिर के ऊपर बढ़ता जा रहा था
ज़मीन कहाँ है..
कहाँ समझ में आ रहा था,
अजीब अनचाहा-सा डर
मेरे हाथों को छटपटाने पे
मजबूर किये जा रहा था,
एक पल को उस गहराई के अंधेरे में
छोड़ दिया खुद को अकेला,
बन्द आँखों को करने दिया फैसला
ज़िन्दगी में आज तक…
जो पार किया था फासला,
उस एक पल में खो जाने दूँ ?
रोक लूँ खुद को ?
या गहराई में डूब जाने दूँ ?
कुछ सोचने से पहले आँखें खुलने लगीं
साँसें धीरे-धीरे बदन को छोड़ने लगीं,
मैं फिर झटपटाई…
रौशनी की ओर दौड़ने लगी…,
न सोचा फिर…
न रोका खुद को…
बस रौशनी की ओर दौड़ने लगी..
न जाने क्यों गहराई मुझे खींचने लगी थी,
मैं चिल्लाई..
पर आवाज़ मेरी…
मेरा साथ छोड़ चुकी थी…
पानी की उस गहराई में..
मेरी आवाज कहीं खो चुकी थी…,
मैं बचना चाहती थी
खुद को साथ पर फिर से
सतह पर खींचना चाहती थी,
लेकिन उस गहराई से मैं कमजोर थी।

कमजोर थी उस गहराई से मैं…
ये जानती थी साँसें छोड़ गईं मुझको…
पर चेहरे पे आखरी मुस्कान थी,
सोचा था डूबना आसान होगा
गहराई की बाँहों में खो जाने से
दिल को मेरे आराम होगा…,
जो सोचा वो किया नहीं
जो चाह के आयी थी
वो हुआ ज़रूर था,
हाँ उस वक़्त दिल मेरा मजबूर ज़रूर था
मगर गहराई से मैं कमजोर थी
और मैंने हार मान ली थी,
साँसें छोड़ गई मुझको
पर चेहरे पर आखरी मुस्कान थी॥

परिचय – प्रकृति दोशी की जन्म तारीख ४ जून १९९९ और जन्म स्थान जबलपुर(मध्यप्रदेश) है। वर्तमान में भोपाल(मध्यप्रदेश) में निवासरत और स्थाई पता जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ है। शिक्षा बी.एस-सी.( इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) है। कार्यक्षेत्र में फिलहाल शिक्षारत है।