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जीवन पथ

आशा आजाद`कृति
कोरबा (छत्तीसगढ़)
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जीवन पथ ही समर भूमि है, पार स्वयं कर लो।
उलझन से है आप निकलना, गाँठ बाँध धर लो॥

हर क्षण नित्य परीक्षा लेता, कष्ट बहुत मिलता,
जब करता संघर्ष मनुज तो, हृदय कुंज खिलता।
कठिन डगर पर डटे रहो तुम, ज्ञान प्रभा भर लो,
जीवन पथ ही समर भूमि है, पार स्वयं कर लो…॥

व्यर्थ दिखावा त्याग सभी को, ध्येय श्रेष्ठ चुनना,
जिज्ञासा के पथ को चुनकर, स्वप्न शुभम् बुनना।
गहराई में उतरो इतना, मंजिल को वर लो,
जीवन पथ ही समर भूमि है, पार स्वयं कर लो…॥

दुनिया के पीछे मत भागो, व्यर्थ लोभ डरना,
ज्ञान दिशा का शुभ पथ होवे, नेक कर्म करना।
शिक्षा दीक्षा ज्ञान साधना, पार करो तर लो,
जीवन पथ ही समर भूमि है, पार स्वयं कर लो…॥

कभी निराशा हाथ लगेगी, देख नहीं डरना,
मंजिल पर पहुँचोगे फिर तुम, ज्ञान दान करना।
सीख तभी देना पहले तुम, तमस प्रथम हर लो,
जीवन पथ ही समर भूमि है, पार स्वयं कर लो…॥

परिचय–आशा आजाद का जन्म बाल्को (कोरबा,छत्तीसगढ़)में २० अगस्त १९७८ को हुआ है। कोरबा के मानिकपुर में ही निवासरत श्रीमती आजाद को हिंदी,अंग्रेजी व छत्तीसगढ़ी भाषा का ज्ञान है। एम.टेक.(व्यवहारिक भूविज्ञान)तक शिक्षित श्रीमती आजाद का कार्यक्षेत्र-शा.इ. महाविद्यालय (कोरबा) है। सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत आपकी सक्रियता लेखन में है। इनकी लेखन विधा-छंदबद्ध कविताएँ (हिंदी, छत्तीसगढ़ी भाषा)सहित गीत,आलेख,मुक्तक है। आपकी पुस्तक प्रकाशाधीन है,जबकि बहुत-सी रचनाएँ वेब, ब्लॉग और पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हुई हैं। आपको छंदबद्ध कविता, आलेख,शोध-पत्र हेतु कई सम्मान-पुरस्कार मिले हैं। ब्लॉग पर लेखन में सक्रिय आशा आजाद की विशेष उपलब्धि-दूरदर्शन, आकाशवाणी,शोध-पत्र हेतु सम्मान पाना है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-जनहित में संदेशप्रद कविताओं का सृजन है,जिससे प्रेरित होकर हृदय भाव परिवर्तन हो और मानुष नेकी की राह पर चलें। पसंदीदा हिन्दी लेखक-रामसिंह दिनकर,कोदूराम दलित जी, तुलसीदास,कबीर दास को मानने वाली आशा आजाद के लिए प्रेरणापुंज-अरुण कुमार निगम (जनकवि कोदूराम दलित जी के सुपुत्र)हैं। श्रीमती आजाद की विशेषज्ञता-छंद और सरल-सहज स्वभाव है। आपका जीवन लक्ष्य-साहित्य सृजन से यदि एक व्यक्ति भी पढ़कर लाभान्वित होता है तो, सृजन सार्थक होगा। देवी-देवताओं और वीरों के लिए बड़े-बड़े विद्वानों ने बहुत कुछ लिख छोड़ा है,जो अनगिनत है। यदि हम वर्तमान (कलयुग)की पीड़ा,जनहित का उद्धार,संदेश का सृजन करें तो निश्चित ही देश एक नवीन युग की ओर जाएगा। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“हिंदी भाषा से श्रेष्ठ कोई भाषा नहीं है,यह बहुत ही सरलता से मनुष्य के हृदय में अपना स्थान बना लेती है। हिंदी भाषा की मृदुवाणी हृदय में अमृत घोल देती है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति की ओर प्रेम, स्नेह,अपनत्व का भाव स्वतः बना लेती है।”

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