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तीन जोड़ी पायल…

मनोज कुमार सामरिया ‘मनु’
जयपुर(राजस्थान)
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जबसे मैंने सुनना सीखा
सुनकर गुनना सीखा,
तब से मैं पहचानता हूँ
पायल को और उसकी छनछन को।

पहले जब मैं भूख से बिलखकर
तड़प-तड़प कर रो-रो कर,
आँगन को उठा लेता था सिर पर…
तब कहीं से चला आता था,
पायल का स्वर…।

हाँ ये माँ के आने का संकेत था
अब मैं महफूज हूँ,
अब ना भूख सताएगी,
और ना ही निगोड़ी भूतनी…
पायल के साथ एक और आवाज
मैं बखूबी पहचानता था,
वो थी चूड़ियों की छनछन…
धीरे-धीरे आँगन में ही कहीं
गुम हो गई ये आवाज…।

लेकिन एक लम्बे अर्से बाद,
एक बार फिर घर में पायल
की झंकार हुई….
मन में बचपन की स्मृति कौंध गई…
अहा ..! ये तो वैसी ही आवाज है,
इसके पीछे भी एक राज है।
शने-शने यह आवाज भी,
लुप्त होने लगी घर के
शोर-शराबे में…।

शायद मैं ही नहीं सुन पा रहा था इसे,
और मैं उस आवाज को
लगभग भूल गया था कि अचानक
मेरी छुटकी बिटिया रूठ गई,
जाने उसकी कौन-सी आशा टूट गई।

पूछा तो पाया कि उसको तो,
बजने वाली ही चाहिए पायल…
सुनकर मन मेरा हो गया कायल।
मैंने उसे गोद में उठाकर सहलाया,
“पायल ही चाहिए ?”
कहकर मुस्काया…।
पहन के पायल वो पूरे घर में
छम-छम करती घूमेगी…
चलो इसी बहाने पायल की धुन
घर-आँगन,दीवारों को चूमेगी…।
पर बीता वक्त
बिटिया भी हुई सयानी,
ये निगोड़ी पायल भी हुई बेगानी…।

इस तरह मेरे आँगन में,
यहीं कहीं खो गई तीन जोड़ी पायल…
सोचकर मन आज भी होता है घायल…।
होता बार- बार मैं अधीर हूँ
कहाँ से लाऊँ फिर से तीन जोड़ी पायल…॥

परिचय-मनोज कुमार सामरिया का उपनाम `मनु` है,जिनका  जन्म १९८५ में २० नवम्बर को लिसाड़िया(सीकर) में हुआ है। जयपुर के मुरलीपुरा में आपका निवास है। आपने बी.एड. के साथ ही स्नातकोत्तर (हिन्दी साहित्य) तथा `नेट`(हिन्दी साहित्य) की भी शिक्षा ली है। करीब ८  वर्ष से हिन्दी साहित्य के शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं और मंच संचालन भी करते हैं। लगातार कविता लेखन के साथ ही सामाजिक सरोकारों से जुड़े लेख,वीर रस एंव श्रृंगार रस प्रधान रचनाओं का लेखन भी श्री सामरिया करते हैं। आपकी रचनाएं कई माध्यम में प्रकाशित होती रहती हैं। मनु  कई वेबसाइट्स पर भी लिखने में सक्रिय हैंl साझा काव्य संग्रह में-प्रतिबिंब,नए पल्लव आदि में आपकी रचनाएं हैं, तो बाल साहित्य साझा संग्रह-`घरौंदा`में भी जगह मिली हैl आप एक साझा संग्रह में सम्पादक मण्डल में सदस्य रहे हैंl पुस्तक प्रकाशन में `बिखरे अल्फ़ाज़ जीवन पृष्ठों पर` आपके नाम है। सम्मान के रुप में आपको `सर्वश्रेष्ठ रचनाकार` सहित आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ सम्मान आदि प्राप्त हो चुके हैंl