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तुम यहीं हो

कवि योगेन्द्र पांडेय
देवरिया (उत्तरप्रदेश)
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मैं ढूंढ रहा हूँ,
तेरे क़दमों के निशान
तुम यहीं हो,
तुम यहीं कहीं हो।

ये हवा में महक,
चूड़ियों की खनक
बस यही कह रही है,
तुम यहीं हो…
तुम यहीं कहीं हो॥

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