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तू ही सृष्टि

सारिका त्रिपाठी
लखनऊ(उत्तरप्रदेश)
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‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष…………………

तू ही धरा,तू सर्वथा,
तू बेटी है,तू ही आस्था।
तू नारी है,मन की व्यथा,
तू परम्परा,तू ही प्रथा।

तुझसे ही तेरे तप से ही रहता सदा यहां अमन,
तेरे ही प्रेमाश्रुओं की शक्ति करती वसु को चमन।
तेरे सत्व की कथाओं को,करते यहाँ सब नमन,
फिर क्यों यहाँ,रहने देती है सदा मैला तेरा दामन।

तू माँ है,तू देवी,तू ही जगत अवतारी है,
मगर फिर भी क्यों तू वसुधा की दु:खियारी है।
तेरे अमृत की बूंद से आते यहां जीवन वरदान हैं,
तेरे अश्रु की बूंद से ही यहाँ सागर में उफान हैं।

तू सीमा है चैतन्य की,जीवन की सहनशक्ति है,
ना लगे तो राजगद्दी है और लग जाए तो भक्ति है।
तू वंदना,तू साधना,तू शास्त्रों का सार है,
तू चेतना,तू सभ्यता,तू वेदों का आधार है।

तू लहर है सागर की,तू उड़ती मीठी पवन है,
तू कोष है खुशियों का,इच्छाओं का शमन है।
तुझसे ही ये ब्रह्मांड है और तुझसे ही सृष्टि है,
तुझसे ही जीवन और तुझसे ही यहाँ वृष्टि है।

उठ खड़ी हो पूर्णशक्ति से,
फिर रोशन कर दे ये जहां।

जा प्राप्त कर ले अपने अधूरे स्वप्न को,
आ सुकाल में बदल दे इस अकाल को।
तू ही तो भंडार समस्त शक्तियों का,
प्राणी देह में भी संचार है तेरे लहू का॥

परिचय-सारिका त्रिपाठी का निवास उत्तर प्रदेश राज्य के नवाबी शहर लखनऊ में है। यही स्थाई निवास है। इनकी शिक्षा रसायन शास्त्र में स्नातक है। जन्मतिथि १९ नवम्बर और जन्म स्थान-धनबाद है। आपका कार्यक्षेत्र- रेडियो जॉकी का है। यह पटकथा लिखती हैं तो रेडियो जॉकी का दायित्व भी निभा रही हैं। सामाजिक गतिविधि के तहत आप झुग्गी बस्ती में बच्चों को पढ़ाती हैं। आपके लेखों का प्रकाशन अखबार में हुआ है। लेखनी का उद्देश्य- हिन्दी भाषा अच्छी लगना और भावनाओं को शब्दों का रूप देना अच्छा लगता है। कलम से सामाजिक बदलाव लाना भी आपकी कोशिश है। भाषा ज्ञान में हिन्दी,अंग्रेजी, बंगला और भोजपुरी है। सारिका जी की रुचि-संगीत एवं रचनाएँ लिखना है।