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न आए तुम…

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’ 
गोरखपुर(उत्तर प्रदेश)

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तमाम उम्र हाय तमाम उम्र,
गुजार दी मैंने
तेरे ही इंतज़ार में,
ओये न आये तुम।
ओये न आये तुम,
लम्हों बहार में॥
ख्वाबों की हकीकत,
के दस्तक से
दिल में तेरे
दिल में,
मुहब्बत बिखेरता
हर सुबह-शाम तेरे ही इंतज़ार
में॥
तन्हा ज़िन्दगी के
कोई शिकवा गिला
नहीं,
तेरे इंतज़ार में
लम्हा-लम्हा,
तेरी ही राह देखता
एक ख़ुशी के
चिराग के आस-विश्वास में,
दुआ मांगता
खुदा से।
तेरी चाहतों
मुहब्बतों का,
गर मुलाक़ात
हो लम्हें इज़हार में॥
दुनिया में ख़ुशी,
बहुत दिल
जानता नहीं
जहाँ को,
इस जहाँ में
ख्वाहिशों की धड़कन
तेरे दीदार में॥
वक्त की मौज
अपनी रफ्तारों में
हर लम्हा
वक्त की धार मझधार में।
मैं तो जिन्दगी की
उसी शाम में,
जहाँ जुदा हुआ
मेरा दिल प्यार में।
गम के लम्हों को जीता,
जा रहा हूँ बस एक नजर ज़िन्दगी
ज़िन्दगी के इंतज़ार में॥

परिचय-एन.एल.एम. त्रिपाठी का पूरा नाम नंदलाल मणी त्रिपाठी एवं साहित्यिक उपनाम पीताम्बर है। इनकी जन्मतिथि १० जनवरी १९६२ एवं जन्म स्थान-गोरखपुर है। आपका वर्तमान और स्थाई निवास गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) में ही है। हिंदी,संस्कृत,अंग्रेजी और बंगाली भाषा का ज्ञान रखने वाले श्री त्रिपाठी की पूर्ण शिक्षा-परास्नातक हैl कार्यक्षेत्र-प्राचार्य(सरकारी बीमा प्रशिक्षण संस्थान) है। सामाजिक गतिविधि के निमित्त युवा संवर्धन,बेटी बचाओ आंदोलन,महिला सशक्तिकरण विकलांग और अक्षम लोगों के लिए प्रभावी परिणाम परक सहयोग करते हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत,ग़ज़ल,नाटक,उपन्यास और कहानी है। प्रकाशन में आपके खाते में-अधूरा इंसान (उपन्यास),उड़ान का पक्षी,रिश्ते जीवन के(काव्य संग्रह)है तो विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। ब्लॉग पर भी लिखते हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-भारतीय धर्म दर्शन अध्ययन है। लेखनी का उद्देश्य-समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करना है। लेखन में प्रेरणा पुंज-पूज्य माता-पिता,दादा और पूज्य डॉ. हरिवंशराय बच्चन हैं। विशेषज्ञता-सभी विषयों में स्नातकोत्तर तक शिक्षा दे सकने की क्षमता है।