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बचपन, बच्चे और चूजे

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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रश्क करती रूह ये आसार थे,
भूतिया सूने महल झनकार थी।

बात ये मासूम बचपन की रही,
तब दिलेरी दोस्त कारोबार था।

ख़ौफ का आलम न पूछो जाने दो,
मौत के महबूब का दीदार था।

आज करने हम चले मुआयना,
दीद चश्में क्या गज़ब दीदार था।

रख हथेली ख़ौफ़ दाखिल तह गये,
हालते मंजर अजब सरकार था।

करके हिम्मत चल पड़े हम शेर दिल,
हाथ में बस कागजी तलवार थी।

भूख में मासूम बेहाल से तड़पते,
कुछ यतीमों की मची चीत्कार थी।

ढूँढने दाना गई माँ पास में,
खुद बनी खाना, निर्मम शिकार था।

लोग गौरैया बचाओ कह रहे,
मारता फिर कौन ये गद्दार था॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।

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