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मंगल कामना

आशा आजाद`कृति`
कोरबा (छत्तीसगढ़)

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नया उजाला-नए सपने…

शुभ नव मंगल कामना, सुखमय हो नववर्ष,
अंतर मन उल्लास हो, जीवन हो नित हर्ष।
दुख सुख सह आगे बढ़े, यही प्रार्थना आज-
स्वथ्य देह निर्मल हृदय, होवे तन प्रतिवर्ष॥

मृदुवाणी स्वर मधुर हो ,स्वप्न रहे साकार,
सुखमय जीवन आपका, धरें हृदय में प्यार।
मानवता का पथ रहे, ऐसा हो शुभ ध्येय-
मनुज मनुज से प्रेम रख, सुंदर दें व्यवहार॥

कर्म धर्म शुभ भावना, बनें मनुज पहचान,
हिय के सच्चे भाव से, हो सुंदर गुणगान।
नेक कर्म ऐसा रहे, कर दे जन उद्धार-
द्वेष कपट को त्याग कर, होवें मनुज सुजान॥

दिव्य ज्ञान के दीप से, गढ़े नया प्रतिमान,
सूक्ष्म ज्ञान के लाभ से, होवे कार्य महान।
जिज्ञासा को पूर्ण कर, धर लें अनुपम सार-
अर्जित करके सार को, करते जाएँ दान॥

कलम चले सत राह पर, सच्चा होवे कर्म,
जग के नव उपमेय बन, श्रेष्ठ निभाये धर्म।
सृजन गढ़े संदेश नव, सर्व सत्य का सार-
दीन दुखी के पीर का, हिय से समझे मर्म॥

परिचय–आशा आजाद का जन्म बाल्को (कोरबा,छत्तीसगढ़)में २० अगस्त १९७८ को हुआ है। कोरबा के मानिकपुर में ही निवासरत श्रीमती आजाद को हिंदी,अंग्रेजी व छत्तीसगढ़ी भाषा का ज्ञान है। एम.टेक.(व्यवहारिक भूविज्ञान)तक शिक्षित श्रीमती आजाद का कार्यक्षेत्र-शा.इ. महाविद्यालय (कोरबा) है। सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत आपकी सक्रियता लेखन में है। इनकी लेखन विधा-छंदबद्ध कविताएँ (हिंदी, छत्तीसगढ़ी भाषा)सहित गीत,आलेख,मुक्तक है। आपकी पुस्तक प्रकाशाधीन है,जबकि बहुत-सी रचनाएँ वेब, ब्लॉग और पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हुई हैं। आपको छंदबद्ध कविता, आलेख,शोध-पत्र हेतु कई सम्मान-पुरस्कार मिले हैं। ब्लॉग पर लेखन में सक्रिय आशा आजाद की विशेष उपलब्धि-दूरदर्शन, आकाशवाणी,शोध-पत्र हेतु सम्मान पाना है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-जनहित में संदेशप्रद कविताओं का सृजन है,जिससे प्रेरित होकर हृदय भाव परिवर्तन हो और मानुष नेकी की राह पर चलें। पसंदीदा हिन्दी लेखक-रामसिंह दिनकर,कोदूराम दलित जी, तुलसीदास,कबीर दास को मानने वाली आशा आजाद के लिए प्रेरणापुंज-अरुण कुमार निगम (जनकवि कोदूराम दलित जी के सुपुत्र)हैं। श्रीमती आजाद की विशेषज्ञता-छंद और सरल-सहज स्वभाव है। आपका जीवन लक्ष्य-साहित्य सृजन से यदि एक व्यक्ति भी पढ़कर लाभान्वित होता है तो, सृजन सार्थक होगा। देवी-देवताओं और वीरों के लिए बड़े-बड़े विद्वानों ने बहुत कुछ लिख छोड़ा है,जो अनगिनत है। यदि हम वर्तमान (कलयुग)की पीड़ा,जनहित का उद्धार,संदेश का सृजन करें तो निश्चित ही देश एक नवीन युग की ओर जाएगा। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“हिंदी भाषा से श्रेष्ठ कोई भाषा नहीं है,यह बहुत ही सरलता से मनुष्य के हृदय में अपना स्थान बना लेती है। हिंदी भाषा की मृदुवाणी हृदय में अमृत घोल देती है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति की ओर प्रेम, स्नेह,अपनत्व का भाव स्वतः बना लेती है।”

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