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महापर्व-मतदान️ करें

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’
बेंगलुरु (कर्नाटक)
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क्या आपने मतदान किया ?
मित्रों,हाँ हमने मतदान किया,
मत के न केवल अधिकारी हम
वरन् कर्तव्यनिष्ठ जाग्त सशक्त,
सतर्क सदा तत्पर प्रबुद्ध
हम प्रजा प्रबल हैं हस्ताक्षर,
है यह लोकतंत्र का महापर्व
तभी शक्ति समुन्नत होंगे,
सदभाव शान्ति व नीति प्रीति
हो शिक्षित समदर्शी लोकपाल,
जनप्रतिनिधि चयन हो लोकप्रिय
हो चुनावी वादाओं का मकड़जाल,
उसमें आबद्ध न हो जनता चिन्तन
हो सही चिह्न निशान सतत्,
मतदाता हम पहचान पत्र
बन लोकतंत्र का परिचायक,
बन शाश्वत परिचारक लोकतंत्र
हैं राष्ट्र भक्ति का मानक हम,
हों दृढ़ प्रतिज्ञ हम राष्ट्रशक्ति
हो राष्ट्रधर्म सबसे ऊपर,
हम धीर-वीर योद्धा सम्बल
सपना पूरा हो प्रजातंत्र,
आओ,मिलकर हम मतदान करें
नवनीति राष्ट्र नवरंग भरें,
कर निर्माण वतन आधार बने
सुयोग्य बने सबका प्रतिनिधि,
हो सापेक्षित निर्वाचन पद्धति
गौरवान्वित नित,मज़बूर न हो,
मज़बूत बने संविधान निरत
अपना भारत है संघीय राष्ट्र,
हों मतदाता सज़ग कर्तव्यपथी
न केवल अधिकारी हों अधिनायक।
हो जनतंत्र सुदृढ़,मतदान करें,
सौभाग्यवान् मतदाता हम भारतीय
हम अधिकारी संविधान प्रदत्त,
सुवरदान प्राप्त हैं हम मतदाता
हो सारोग्य सुखद सुशान्त प्रगति।
जय हो भारत का लोकतंत्र,
जय हो अभिमत जनमन तिरंग
हो निरपेक्ष कान्तिमय भारत जय,
भाषा संस्कृति वैविध्यपूर्ण
हो सदभावपूर्ण और जाति विरत,
न वोटबैंक धर्मान्ध पथिक
जन-मन भावक कल्याण निरत,
सरकार चयन हों जन प्रतिनिधि
आओ हम मिल मतदान करें,
महकें खुशियाँ,न कोई आहें भरें
जय हो निर्माणक निर्णायक हम,
इस महापर्व में निज अवदान करें
वरदान मिला यह जन-मनभावन,
चुनें प्रतिनिधि अपना मतदान करें।

परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ है। १४ जुलाई १९६६ को दरभंगा में जन्मे डॉ. झा का वर्तमान निवास बेंगलुरु (कर्नाटक)में,जबकि स्थाई पता-दिल्ली स्थित एन.सी.आर.(गाज़ियाबाद)है। हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी,मैथिली,बंगला, नेपाली,असमिया,भोजपुरी एवं डोगरी आदि भाषाओं का ज्ञान रखने वाले श्री झा का संबंध शहर लोनी(गाजि़याबाद उत्तर प्रदेश)से है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत,इतिहास),बी.एड.,एल.एल.बी., पीएच-डी. और जे.आर.एफ. है। आपका कार्यक्षेत्र-वरिष्ठ अध्यापक (मल्लेश्वरम्,बेंगलूरु) का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंंदी भाषा के प्रसार-प्रचार में ५० से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा-मुक्तक,छन्दबद्ध काव्य,कथा,गीत,लेख ,ग़ज़ल और समालोचना है। प्रकाशन में डॉ.झा के खाते में काव्य संग्रह,दोहा मुक्तावली,कराहती संवेदनाएँ(शीघ्र ही)प्रस्तावित हैं,तो संस्कृत में महाभारते अंतर्राष्ट्रीय-सम्बन्धः कूटनीतिश्च(समालोचनात्मक ग्रन्थ) एवं सूक्ति-नवनीतम् भी आने वाली है। विभिन्न अखबारों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। विशेष उपलब्धि-साहित्यिक संस्था का व्यवस्थापक सदस्य,मानद कवि से अलंकृत और एक संस्था का पूर्व महासचिव होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी साहित्य का विशेषकर अहिन्दी भाषा भाषियों में लेखन माध्यम से प्रचार-प्रसार सह सेवा करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है। प्रेरणा पुंज- वैयाकरण झा(सह कवि स्व.पं. शिवशंकर झा)और डॉ.भगवतीचरण मिश्र है। आपकी विशेषज्ञता दोहा लेखन,मुक्तक काव्य और समालोचन सह रंगकर्मी की है। देश और हिन्दी भाषा के प्रति आपके विचार(दोहा)-
स्वभाषा सम्मान बढ़े,देश-भक्ति अभिमान।
जिसने दी है जिंदगी,बढ़ा शान दूँ जान॥ 
ऋण चुका मैं धन्य बनूँ,जो दी भाषा ज्ञान।
हिन्दी मेरी रूह है,जो भारत पहचान॥