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सुलगे प्रीत उमंग

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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श्रंगार रस….

तन भीगा बरसात में,सुलगे प्रीत उमंग।
सजनी तेरी चाह में,हिय में उठे तरंग॥

शीतल पुरवाई चले,रिमझिम गिरे फुहार।
याद बहुत आई प्रिये,पायल की झनकार॥

ठिठुरन-सी है देह में,छन्द नहीं कुछ गेय।
जो तुम होती पास में,गर्म पिलाती पेय॥

भरती मन में ऊष्णता,पा कर तेरा दर्श।
रोम-रोम खिलते प्रिये,दैहिक मिलता स्पर्श॥

सुखद बात करते प्रिये,हँसते खिलती रीत।
पावन सावन माह-सी,पलती सजनी प्रीत॥

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा है। आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) है। सिकन्दरा में ही आपका आशियाना है।राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन (राजकीय सेवा) का है। सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैं। लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैं। शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया है।आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः है।

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