कुल पृष्ठ दर्शन : 554

You are currently viewing हुआ विसर्जन

हुआ विसर्जन

दिनेश चन्द्र प्रसाद ‘दीनेश’
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
*******************************************

दस दिन की पूजा-अर्चना के बाद,
श्रीगणेश जी का हुआ विसर्जन।

सबने दूर कर लिया संकट अपना,
पूरा हुआ बहुतों का आज सपना।

सबने मांग ली है मन्नत भरपूर,
गणपति बप्पा ने दिया सबको प्रचुर।

सबने जब कर लिया पुन्य अर्जन,
गणपति जी का तब हुआ विसर्जन।

लाखों-करोड़ों चले गए पानी में,
गणेश जी गए अपनी राजधानी में।

भक्तों के कष्ट हरने यहाँ पर आते,
अपने भक्तों पर प्यार है बरसाते।

विसर्जन कर सब करते हैं तर्पण,
गणपति जी का होता है विसर्जन।

चतुर्थी को आते हैं गणपत बप्पा,
चतुर्दशी को जाते गणपत बप्पा।

सब देवों के होते हैं ये तो अगुआन,
गणपति बप्पा ही है सबसे महान।

‘दीनेश’ भी करता पूजा व अर्चन,
गणपति जी का हुआ है विसर्जन॥

परिचय– दिनेश चन्द्र प्रसाद का साहित्यिक उपनाम ‘दीनेश’ है। सिवान (बिहार) में ५ नवम्बर १९५९ को जन्मे एवं वर्तमान स्थाई बसेरा कलकत्ता में ही है। आपको हिंदी सहित अंग्रेजी, बंगला, नेपाली और भोजपुरी भाषा का भी ज्ञान है। पश्चिम बंगाल के जिला २४ परगाना (उत्तर) के श्री प्रसाद की शिक्षा स्नातक व विद्यावाचस्पति है। सेवानिवृत्ति के बाद से आप सामाजिक कार्यों में भाग लेते रहते हैं। इनकी लेखन विधा कविता, कहानी, गीत, लघुकथा एवं आलेख इत्यादि है। ‘अगर इजाजत हो’ (काव्य संकलन) सहित २०० से ज्यादा रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। आपको कई सम्मान-पत्र व पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। श्री प्रसाद की लेखनी का उद्देश्य-समाज में फैले अंधविश्वास और कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करना, बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा देना, स्वस्थ और सुंदर समाज का निर्माण करना एवं सबके अंदर देश भक्ति की भावना होने के साथ ही धर्म-जाति-ऊंच-नीच के बवंडर से निकलकर इंसानियत में विश्वास की प्रेरणा देना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-पुराने सभी लेखक हैं तो प्रेरणापुंज-माँ है। आपका जीवन लक्ष्य-कुछ अच्छा करना है, जिसे लोग हमेशा याद रखें। ‘दीनेश’ के देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-हम सभी को अपने देश से प्यार करना चाहिए। देश है तभी हम हैं। देश रहेगा तभी जाति-धर्म के लिए लड़ सकते हैं। जब देश ही नहीं रहेगा तो कौन-सा धर्म ? देश प्रेम ही धर्म होना चाहिए और जाति इंसानियत।