बदलते खेत
ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* नहीं रहे वे खेत, जिसमें से गुजरकर सौंधी-सौंधी खुशबू के साथ हवा के झकोरे आते थेl नहीं रहे वे किसान, जो दिनभर काम करने के बावजूद कभी नहीं थकते थे। नहीं रही वह रौनक, जब किसान को देखकर खेत दूर से मुस्कराते थेl जोतते हुए बैलों के गले में, पड़े घुँघरूओं … Read more