बेटियाँ

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** एक मजदूर की बेटी, जब स्कूल जाने की इच्छा जताती है उस रात पिता को नींद नहीं आती है, पहुंचाते हुए बेटी को स्कूल दिखाई पड़तीं हैं उबड़-खाबड़ रास्तों से, रफ्तार से गुज़रती बैने,मोटरसाइकिलें कि हिल जाता है पिता अपनी जगह से, और एक अमीर की बेटी बगैर … Read more

रे कपूत!अब भी संभल

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** गाली दे दे एक को,तुम बना दिये स्टार। जनता अब बुद्धू नहीं,जीते चौकीदारll गाली दे थकते नहीं,बहुसंख्यक को आज। लोकतंत्र है शर्मसार,बन वोट बैंक समाजll जमानती हैं एक मंच,निज कुनबों के साथ। सोच न बदली सल्तनत,मिले चोर के हाथll कहते हो हम हैं वतन,मिले साथ हो पाक। आतंक … Read more

जरूरत है राजनीतिक परिष्कार की

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* इन आम चुनावों में बड़े विरोधाभास दिख रहे हैं। एक बड़ा विरोधाभास है राजनीतिक घोषणाओं एवं आश्वासनों में,जो तमाम अंधेरों के बीच चांद उगाने की कोशिशें कर रहा है। इन सबके बीच आप और हम उन चार अंधों को मिले हाथी की तरह हैं,जो अपने मापदंडों के साथ अपना-अपना सच परखने … Read more

प्रीत की पुकार से

प्रभात कुमार दुबे(प्रबुद्ध कश्यप) देवघर(झारखण्ड) *********************************************** प्रीत की पुकार सेl रीत की गुहार सेl हो नहीं अधीर-सा। ठोक ताल बीर-सा। है धरा पुकारती। है तुझे गुहारती। सत्य पे डटे रहो। क्षेम पे गहे रहो। कृष्ण-सा कहो वही। पार्थ-सा लड़ो कहीं। सोभती भुजंग वो। रोक पाश जंग जो। धीर-सा रहो कहीं। चीर-सा फटो नहीं। रीत प्रेमजीत … Read more

चुनाव

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** सत्यता की शपथ वह खाने लगे हैं, जबसे चुनाव करीब आने लगे हैं। फिर वादों का अंबार होगा, फिर माइक पे एलान होगा फिर एक दूजे पे लांछन लगाने लगे हैं। जबसे चुनाव करीब… सत्ता इन पर अजब है नशा, राजनीति के अखाड़े में बुरी है दशा। वह कुर्सी के चक्कर … Read more

मतदान जागरूकता

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* जागरूक होकर करो,मतदाता मतदान। राजधर्म निर्वाह को, करिये ये शुभदानll सब कामों को छोड़कर,करना है यह काम। एक दिवस मतदान का,बाकी दिन आरामll सही करो मतदान तो,हो उत्तम सरकार। मन का प्रत्याशी चुनो,मत दे कर हर बारll डरो नहीं,झिझको नहीं,रहे प्रशासन संग। अच्छा प्रत्याशी चुनो,लोकतंत्र के अंगll अब आलस को त्यागिए,चलो … Read more

हर विधा में परिपूर्ण है ‘काव्यांजलि’

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** पुस्तक समीक्षा……………….. वर्तमान अंकुर प्रकाशन के अंतर्गत साझा काव्य संग्रह की श्रृंखला में ‘काव्यांजलि’ हर प्रकार की विधाओं से परिपूर्ण एक खूबसूरत संग्रह है। इस संग्रह का संपादन निर्मेश त्यागी ने किया है। १२ कवियों की रचनाओं से परिपूर्ण यह काव्य संग्रह पाठकों को आकर्षित करता है। हरियाणा के देशपाल … Read more

घोंसला

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* तिनका-तिनका चुन-चुन पँछी ने, बनाया एक नीड़ सजाया उसे, कपड़ों की चिन्दी उलझे धागों और टूटी-फूटी चीजों से, ताकि आने वाले नन्हें चूजों को जरा-सी भी, तकलीफ़ न हो। बड़े अरमानों से सेता है वो कई-कई दिनों तक अपने अंडों को, फूटते हैं अंडे चहकते हैं नन्हें चूजे, चोंच से … Read more

आतंक

गंगाप्रसाद पांडे ‘भावुक’ भंगवा(उत्तरप्रदेश) **************************************************************** प्रार्थना में उठे हाथ, उड़ गये चीथड़े। दीवारों पे बिखरा रक्त, लोग इधर उधर पड़े मिले। चारों ओर सिर्फ चीखें, कौन मनाये ईस्टर। पूरा चर्च था खून से सना, कितना भयानक मंजर। एक के बाद एक, सिलसिलेवार विस्फोट। एक विशेष ही समुदाय, को पहुँचाई चोट। रोते बच्चे,बिखरी महिलाएं, अधमरे बुजुर्ग। … Read more

माँ की सीख..

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** चाहे पथ पर बाधाओं के, शैल-शिखर से उठते हों। चाहे पग पर पराभवों के, शूल नुकीले चुभते हों॥ मैं साहस के जुगनू लेकर, पथ पर दीप जलाता हूँ। कभी किसी पल मोती देंगे, उर में सीप सजाता हूँ॥ आज निराशा लोरी गाती, विजय गान भी आयेंगे। हृदय मेरा पुलकित होगा, … Read more