धरती को बुखार से बचाएं

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… कितना अजीब लगता है ये शीर्षक पढ़कर-‘धरती का बुखार’ ? जब हमारे शरीर का तापमान बढ़ता है तो हम उसे बुखार कहते हैं,उसी प्रकार धरती का तापमान बढ़ता है तो उसे धरती का बुखार कह सकते हैं। पृथ्वी के इस बढ़े हुए तापमान को विश्व तपन … Read more

धरती

आरती जैन डूंगरपुर (राजस्थान) ********************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… धरा सुंदर कृति है, होना है इस पर सतीl धरा सुंदर रचना है, पेड़ जिसके सजना हैl कल-कल करती नदी बहती, तो कभी पत्थरों का भार सहतीl इस धरा पर ना कोई हो सीमा, एक प्रेम रूपी संगीत चले धीमाl धरा से बहता है जब … Read more

जीवन का आधार `धरा`

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… धरा धैर्य को धारण करती, धरा की है अमिट कहानी पानी पर है तैरती, सहस्त्र थपेड़ों की मार झेलती। सूर्य की परिक्रमा धरा निरन्तर है करती, संघर्ष सहती मगर कभी कुछ न कहती दिन-रात है सब प्राणियों की एक माला, धरा बतलाती यही है बन्दे तेरा … Read more

धरा

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… अनादि,अनंत,अदृश्या अकाट्य,अभेद्य,अछेद्या अपरुपा के मनः प्राण की, शून्य से परिकल्पित चमत्कार है ये ‘धरा।’ सृजन-संहार की अदभुत क्रीड़ा-स्थली, नवग्रहों में सनातन जीवंत ईश्वर की सुंदर कल्पना की, सचेत प्रतिकृति है। अंबु,अनल,अनिल,अवनि-अम्बर के पंचभूत तत्वों से निर्मित देवो की पुण्य क्रीड़ा-स्थली, परमेश्वर का अनूठा परम धाम … Read more

सूरज कैसा..

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** ऐ मुसाफिर जाग, ज़रा देख आज सूरज कैसा, सुर्ख रूतबा कहीं कहीं घने कोहरे में रुसवा, उड़ती धूल में कहीं धुंध जैसा॥ तल्ख़ तूफ़ान का कायल कहीं, कहीं गर्म हवाओं की हस्ती जैसा॥ सर्द बर्फ बादलों में दिन का उजाला, चाँदनी जैसा॥ देख ऐ मुसाफिर, आज सूरज मौसम अंदाज … Read more

धरा की धीरता धन्य

वन्दना शर्मा अजमेर (राजस्थान) *********************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… धन्य है धरा की धीरता को.., जहाँ जीवन कलकल बहता है.. सींचता हुआ जड़ी-बूटी,वनस्पति, धान्य एवं धमनियों को.. पेड़ों से मिलती है संजीवनी प्राणवायु.., धरती अपना सीना चीरकर.. करती है पोषण प्राणी मात्र का.., अपनी कोख से प्रसूता कष्ट सहन कर.. भरती है मणि रत्नों,धातुओं … Read more

मैं पंछी हूँ

लालचन्द्र यादव आम्बेडकर नगर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… मैं पंछी हूँ,मैं जंगल की रानी हूँ, पेड़,लताएं,कुंजों की दीवानी हूँ। तुम दरख़्त को काट-काट ले जाते हो, तेरे ही कदमों से मिटी कहानी हूँ। अपना रोटी,कपड़ा तुमको याद रहा। मैं बेघर फिरती जैसे दीवानी हूँ। पहले मेरा घर होता था,कुंजों में, आज नहीं,मैं … Read more

खुशियों के बीज

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ इन्दौर मध्यप्रदेश) ********************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… हरी-भरी वसुन्धरा को, देख कर मेरा वतन मुस्कुरा रहा है ऐसे, फूल का कोई चमन। हर जवान देखता है, सीना तानकर यहां आजाद,भगत,बोस ने, जन्म लिया हो जहां। जमीं है मेरे प्यार की, जमीं मेरे दुलार की महक ये बिखेरती, प्रेम,पावन,प्यार की। ये धरा … Read more

यह है धरती सब की जननी

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… यह है धरती सबकी जननी। सब जीव-जनाश्रय है उरवी। यह भू-महिमा अति पुण्यमयी। अति सुंदर है सब सार गहीll पद में जल-सागर अंक लिये। धरती पर शोभित मेघ लिये। खग-झुंड महान भरे नभ में। जल भीतर मीन उछाह लियेll जल-कुंभक,व्याघ्र विशाल भरे। सर-बीच खिले जल-जात … Read more

सँभलना है अगर

कैलाश झा ‘किंकर’ खगड़िया (बिहार) ************************************************************************************ विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… अब दरख़्तों के लिए सोचें सँभलना है अगर, पेड़ की रक्षा करें खुशहाल रहना है अगर। आम,पीपल,नीम,तुलसी,बेल,बरगद के लिए हों सजग सारा ज़माना दूर चलना है अगर। पेड़-पौधों पर टिकी है ज़िन्दगी संसार की, काटिये इनको नहीं आबाद रहना है अगर। साग-सब्जी,फूल,फसलों के बिना … Read more