महावीर बनने की तैयारी में जुटें

ललित गर्ग दिल्ली ************************************************************** (महावीर जयंती १७ अप्रैल विशेष) महावीर जयंती का महत्व सिर्फ जैनियों के लिए ही नहीं,बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के लिये है। जो जैन मत को मानने वाले हैं,वे यह पवित्र दिन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। महावीर की शिक्षाओं की उपादेयता सार्वकालिक,सार्वभौमिक एवं सार्वदेशिक है,दुनिया के तमाम लोगों ने … Read more

आओ,मिलकर `पृथ्वी दिवस` को सार्थक बनाएं

प्रभावती श.शाखापुरे दांडेली(कर्नाटक) ************************************************ विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… सुन मनुज धरा की पुकार, नित सहती है वेदना हजार। आज सुनाऊँ व्यथा निराली, छीनी मुझसे मेरी हरियालीll आज वर्तमान समय में धरा की यह पुकार न जाने कितनों को सुनाई दे रही है। धरा,मनुष्य को रोज पुकार कर कहती है,-“हे मनुज,तू खुद अपना भविष्य खतरे … Read more

सावन-सा त्यौहार

विजयसिंह चौहान इन्दौर(मध्यप्रदेश) ****************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… सूख रही है धरा, सूख रहा है पानी, आँखों काl धरती बनती, मरू ये कैसा रूप, जवानी काl सूखा तन, तपता बदन धूल-गुबार और, आंधी काl रसातल में जा पहुंचा, जल ये कैसा रूप दीवानी काl आओ सजा दें आँचल इस माँ का, करें बूंदों से … Read more

धरती माँ

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… धरती माँ के, अखण्ड रूप को खण्ड-खण्ड करते हो क्यों ? कहते हो माता धरती को, माता के टुकड़े करते क्यों ? काट-काट कर वृक्ष धरा से, नग्न धरा को करते क्यों ? अपने निज स्वार्थ के कारण, धरती का दोहन करते क्यों ? कुकर्मों … Read more

धरती को बुखार से बचाएं

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… कितना अजीब लगता है ये शीर्षक पढ़कर-‘धरती का बुखार’ ? जब हमारे शरीर का तापमान बढ़ता है तो हम उसे बुखार कहते हैं,उसी प्रकार धरती का तापमान बढ़ता है तो उसे धरती का बुखार कह सकते हैं। पृथ्वी के इस बढ़े हुए तापमान को विश्व तपन … Read more

धरती

आरती जैन डूंगरपुर (राजस्थान) ********************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… धरा सुंदर कृति है, होना है इस पर सतीl धरा सुंदर रचना है, पेड़ जिसके सजना हैl कल-कल करती नदी बहती, तो कभी पत्थरों का भार सहतीl इस धरा पर ना कोई हो सीमा, एक प्रेम रूपी संगीत चले धीमाl धरा से बहता है जब … Read more

जीवन का आधार `धरा`

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… धरा धैर्य को धारण करती, धरा की है अमिट कहानी पानी पर है तैरती, सहस्त्र थपेड़ों की मार झेलती। सूर्य की परिक्रमा धरा निरन्तर है करती, संघर्ष सहती मगर कभी कुछ न कहती दिन-रात है सब प्राणियों की एक माला, धरा बतलाती यही है बन्दे तेरा … Read more

धरा

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… अनादि,अनंत,अदृश्या अकाट्य,अभेद्य,अछेद्या अपरुपा के मनः प्राण की, शून्य से परिकल्पित चमत्कार है ये ‘धरा।’ सृजन-संहार की अदभुत क्रीड़ा-स्थली, नवग्रहों में सनातन जीवंत ईश्वर की सुंदर कल्पना की, सचेत प्रतिकृति है। अंबु,अनल,अनिल,अवनि-अम्बर के पंचभूत तत्वों से निर्मित देवो की पुण्य क्रीड़ा-स्थली, परमेश्वर का अनूठा परम धाम … Read more

सूरज कैसा..

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** ऐ मुसाफिर जाग, ज़रा देख आज सूरज कैसा, सुर्ख रूतबा कहीं कहीं घने कोहरे में रुसवा, उड़ती धूल में कहीं धुंध जैसा॥ तल्ख़ तूफ़ान का कायल कहीं, कहीं गर्म हवाओं की हस्ती जैसा॥ सर्द बर्फ बादलों में दिन का उजाला, चाँदनी जैसा॥ देख ऐ मुसाफिर, आज सूरज मौसम अंदाज … Read more

धरा की धीरता धन्य

वन्दना शर्मा अजमेर (राजस्थान) *********************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष…………… धन्य है धरा की धीरता को.., जहाँ जीवन कलकल बहता है.. सींचता हुआ जड़ी-बूटी,वनस्पति, धान्य एवं धमनियों को.. पेड़ों से मिलती है संजीवनी प्राणवायु.., धरती अपना सीना चीरकर.. करती है पोषण प्राणी मात्र का.., अपनी कोख से प्रसूता कष्ट सहन कर.. भरती है मणि रत्नों,धातुओं … Read more