उत्तराखंड की आवाज है ‘पहाड़ी गूंज’

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** वर्तमान अंकुर के तत्वाधान में प्रकाशित साझा काव्य संग्रह पहाड़ी गूंज में हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के रचनाकारों ने अपना अप्रतिम योगदान दिया है। साझा संग्रह तथा क्षेत्रीय साझा संग्रह की श्रृंखला में यह पुस्तक अपना एक अलग स्थान रखती है। पुस्तक का संपादन निर्मेश त्यागी ने किया है तथा … Read more

अडिग हिमालय

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* अडिग हिमालय लिये शिवालय, करता सबका आवाहन। त्याग करो प्रमाद द्वेष का, करो प्रकृति आराधन। नंदा देवी पंचाचूली, जीवन को हर्षित करती। नैना देवी आशीष हमें दे, नव संबल मन में भरती। जो भी आता है यहां प्रवास को, रम जाता है उसका मनll अडिग हिमालय…, कल-कल निर्झर मधुर स्वर, … Read more

मैं गम लिखता हूँ

उज्जवल कुमार सिंह ‘उजाला’ नजफगढ़(नई दिल्ली) ****************************************************************** कलम की नोक से कागज की कोख पर, कहानियाँ जवानी की मजबूरियाँ दीवानी की, मन के गुबार को हरदम लिखता हूँ कागज को चिपकाकर छाती से,उस पर गम लिखता हूँl मगरूरियत जहां में है मजबूरियाँ कहाँ पर है, प्यार जब परवान चढ़े जुगनू आसमान चढ़े, उसको ये पता … Read more

इम्तहान

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* ये जीवन है इक इम्तहान, सबको देना पड़ता है। जो जीता जीवन सोच-समझ, वही सफलता पाता हैll जीवन के इस इम्तहान में, माहिर भी धोखा खा जाते। चक्रव्यूह में इस जीवन के, अच्छे-अच्छे फँस जातेll जीवन की कठिन परीक्षा में, नहीं हौंसला खोता है। जो जीवन में रखता हिम्मत, वही … Read more

शुभ जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ

हिन्दीभाषा.कॉम मंच के रचनाकार साथी अविनाश तिवारी ‘अवि’ जी  का २९ मार्च को  शुभ जन्मदिन है..इस पटल के माध्यम से आप उनको शुभकामनाएं दे सकते हैं…..

आडवाणी स्वयं जिम्मेदार हैं इस हालत के लिए

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** आम स्वयं पकते हैं और पकाये भी जाते हैं। जो स्वयं पकते हैं,वे डाली से स्वयं टूट जाते हैं। उनमें मिठास भी होती है और नैसर्गिक स्वाद भी होता है,तथा दूसरे को जल्दी-जल्दी पकाये जाने के लिए उन्हें पाल में रखा जाता है,और उन्हें बार-बार देखते हैं तो उनमें कोई अधिक … Read more

अपनों से मिलन

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ मिलवाना था अपनों से, तभी तो हमें-तुम्हें इस संसार में लाया है। किये होंगे पूर्व जन्म में कुछ अच्छे कर्म हमने, तभी तो आप जैसे, यार से मिलवाया है॥ अब तो दिल-दिमाग पर, बस तेरा ही नाम रहता है। सुबह तेरे से शुरू होकर, रात तेरे पर खत्म होती है। अब … Read more

हमारे त्यौहार

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** बहुत पुरानी रीत है,भारत के त्योहार। सभी मनाते प्यार से,खुशियों की बौछार॥ भाँति-भाँति के लोग हैं,उनके रीत-रिवाज। सभी धर्म समभाव से,करते हैं मिल काज॥ दीपों को दीपावली,रौशन करते लोग। भाईचारा मन बसे,गले मिले सन्जोग॥ होली जलती होलिका,दुष्कर्मों का नाश। प्रेम प्यार का पर्व यह,होता है आभास॥ रक्षा बन्धन … Read more

हम मन से खारे नहीं

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* यूँ तो सागर हैं हम पर मन से खारे नहीं, मौजों में ही जीते हैं हम किनारे नहीं… अपने दिल को जलाकर रोशनी देते हैं, तुम्हारे पथ में पड़े हैं पर अंगारे नहीं। क्यों सवाल करते कितना प्यार है तुमसे, कहना बनता नहीं बस इजहार है तुमसे… नाप-तौल कभी … Read more

भारतीय

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** युद्ध नहीं है धर्म हमारा, हम तो शांति पुजारी हैं। छेड़ा अगर किसी ने तो, नहीं छोड़ने वाले हैंll चिंगारी को छेड़ोगे तो, बन ज्वाला मिटा देंगे। यदि हम से टकराओगे तो, टुकड़े-टुकड़े कर डालेंगेll अरे दुष्ट! तेरी यह हरकत, कभी सफल नहीं होगी। तेरी सारी गीदड़ चालें, डर-डर कर … Read more