उस घेरे को तोड़ दिया है

डॉ.अमर ‘पंकज’दिल्ली******************************************************** बंद किया था खुद को जिसमें उस घेरे को तोड़ दिया है,मतवादों का गोरख धंधा मैंने अब तो छोड़ दिया है। समता क्रांति मनुजता केवल लफ्ज़ नहीं हैं जीवन दर्शन,पर-हित सुख-सागर की दिशा में दु:ख का दरिया मोड़ दिया है। ज़िल्द फटी पुस्तक भी पुरानी लेकिन है अध्याय नया सा,शंकर बन हालाहल जो … Read more

प्यार में यूँ मरना चाहती

रचना सक्सेनाप्रयागराज(उत्तरप्रदेश)**************************************** मैं समुंदर में उतरना चाहती,प्यार में यूँ डूब मरना चाहती। छोड़ दूँ सारा जहाँ उसके लिये,याद में उसके सँवरना चाहती। है खुदा के नाम में उल्फत निहां,नफरतों सें मैं उबरना चाहती। चाहती हूँ हरितिमा हो हर तरफ,फागुनी कुछ रंग भरना चाहती। दिल दुखाना ही जहाँ में पाप है,मैं नहीं यह पाप करना चाहती। … Read more

मेरे मन का मीत

डॉ. रामबली मिश्र ‘हरिहरपुरी’वाराणसी(उत्तरप्रदेश)****************************************** मेरे मन का मीत मिला है।दिल का प्यारा हुआ खुला हैll यह स्वप्निल स्नेहिल स्वर्णिम अति।साथ निभाता हिला-मिला हैll चमक रहा है तेजपुंज सा।बहुत दुलारा घुला-मिला हैll साथ छोड़कर कहीं न जाताlहाथ पकड़कर राह चला हैll है मदमस्त निराला सुंदर।मृदु भाषण की दिव्य कला हैll गीत सुनाता मधुर स्वरों में।अतिशय मोहक … Read more

किसी और का हूँ

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरीकुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** मुझे यूँ न देखो कुँवारा नहीं हूँ,किसी और का हूँ तुम्हारा नहीं हूँ। न छत पे बुलाओ मुझे रात में तुम,मैं इंसान हूँ चाँद-तारा नहीं हूँ। भले मुझको दौड़ा रहे चार कुत्ते,मुहब्बत की बाज़ी मैं हारा नहीं हूँ। न होगा कोई मेरे हिलने से घायल,मैं नैनों का तेरे इशारा नहीं … Read more

बहुत बोझ रहा हूँ

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************************** पपड़ी जमी़ जो जख्म़ पे वो नोंच रहा हूँ।तन्हा हूँ आज फिर से तुम्हें सोच रहा हूँl कैसे ख़याल हैं कि सिसकने लगे भीतर,खुद को ही खुद की बाँह में दबोच रहा हूँ। पत्थर की छाल रूह को ढक करके सो गई,कब से मैं अपनी साँस को खरोंच रहा हूँ। नजरें … Read more

करम है उसका

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’ जयपुर (राजस्थान) ***************************************************** उसका कद गर बहुत बड़ा है,उसे मुबारक़, गर आसमान में वो उड़ता है,उसे मुबारक़। रब ने तो दी नेअमत,जितना हक़ है जिसका, बख़्शी उसने जमीं ये मुझको,करम है उसका। हासिल तख्तो-ताज़ है उसको,उसे मुबारक़, मालिक़ महलो-बाम का है वो,उसे मुबारक़। परवर है रब, खाली पेट रहे फिर किसका बख़्शे … Read more

मत बाँधो ग़म को तुम…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरीकुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** मत बाँधो ग़म को तुम मन के खूँटे से,दिख जाये तो इसे दबा दो जूते से। मौके तुम ख़ुशियों के मत जाने देना,उनको छोड़ो जो हैं रूठे-रूठे से। उसकी चिंता क्यों करते हो अक्सर तुम ?जो बाहर है भाई तेरे बूते से। किसके ग़म में रोज़ बहाते हो आँसू ?ये … Read more

जमीं पर जिन्दगी

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************** (रचना शिल्प:रदीफ-मिले,काफिया-पर, आकर,जाकर इत्यादि; २१२ २१२ २१२) जिन्दगी तू अगर चाह ले,तो न क्या फिर जमीं में मिले।बस खुदी रख मुकम्मल यहां,फिर सभी कुछ यहीं पर मिले। हैंं खुदा जग मेंं सबसे बड़े,जिन्दगी की खुदी भी बड़ी,दिखते वो ना कभी भी यहां,पर खुदी से खुद आकर मिले। हैं बहुत … Read more

उसने इक नज़र देखा

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)************************************************** इस कदर उसने इक नज़र देखा।हमने ख़ुद को ही बन सँवर देखा। हमने देखा है देखना उसका,उसने मुड़-मुड़ के फिर इधर देखा। दीद के बाद उसकी यादों को,हर क़दम हमने हमसफ़र देखा। उसने पल भर जहाँ किया था क़याम,हमने छू-छू के वो शजर देखा। तन्हा चलते रहे मगर हमने,रास्ता … Read more

खुद को पहचान तो ले

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************** (रचना शिल्प:रदीफ-तो ले,काफिया-मान,जान,तान, ठान,ज्ञान २१२२ १२१२ १२१२ ११२) खुद को पहचान तो ले खुद को पहले जान तो ले।तू जमीं को गगन को अपना पहले मान तो ले। जिन्दगी भर का प्यार मिल सके जहाँ से तुझे,बात ऐसी तू कोई इस जहाँ से जान तो ले। तुझको सब मानते … Read more